Literature Event : रांची में 30 मई को सजेगा साहित्य का महाकुंभ, ‘साहित्य संगम संस्थान’ का राष्ट्रीय वार्षिकोत्सव होगा भव्य

Bindash Bol

Literature Event : झारखंड की राजधानी रांची आगामी 30 मई को साहित्य, कला और संस्कृति के रंगों से सराबोर नजर आएगी। देश की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था साहित्य संगम संस्थान द्वारा आयोजित राष्ट्रीय वार्षिकोत्सव एवं सम्मान समारोह इस बार भव्य और ऐतिहासिक स्वरूप में आयोजित किया जा रहा है। इस एक दिवसीय आयोजन में देश-विदेश के चर्चित साहित्यकार, कवि, लेखक, शिक्षाविद और साहित्य प्रेमी एक मंच पर जुटेंगे।

संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज वीर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि संस्थान का उद्देश्य हिंदी सहित भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन को नई दिशा देना है। साथ ही नवोदित रचनाकारों को मंच उपलब्ध कराना और वरिष्ठ साहित्यकारों के योगदान को सम्मानित करना इस आयोजन की प्राथमिकता रहेगी।

कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण

भव्य कवि सम्मेलन

देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे ख्यातिप्राप्त कवि अपनी रचनाओं के माध्यम से देशभक्ति, सामाजिक सरोकार, मानवीय संवेदनाओं और हास्य-व्यंग्य सहित विभिन्न रसों की प्रस्तुतियां देंगे। कवि सम्मेलन इस आयोजन का मुख्य आकर्षण माना जा रहा है।

अलंकरण एवं सम्मान समारोह

साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वरिष्ठ एवं युवा साहित्यकारों को संस्थान के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत किया जाएगा। यह समारोह देशभर के रचनाकारों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा।

पुस्तकों का लोकार्पण

कार्यक्रम के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से आए लेखकों की नवीन पुस्तकों का लोकार्पण भी किया जाएगा, जिससे साहित्य प्रेमियों को नई रचनाओं से रूबरू होने का अवसर मिलेगा।

कार्यक्रम की जानकारी

दिनांक: 30 मई
स्थान: प्रेस क्लब, रांची
समय: प्रातः 10:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक

साहित्य संगम संस्थान के संयुक्त सचिव एवं स्थानीय संयोजक डॉ. प्रशांत करण ने बताया कि कार्यक्रम की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और रांची में इस साहित्यिक आयोजन को लेकर साहित्य प्रेमियों के बीच विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। उन्होंने शहर एवं आसपास के साहित्य अनुरागियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और आम जनमानस से इस गरिमामयी आयोजन में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर साहित्य के इस उत्सव को सफल बनाने की अपील की है।
इस राष्ट्रीय वार्षिकोत्सव को साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है, जहां शब्द, संवेदना और सृजन का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।

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