Rajya Sabha Election : परिमल नाथवानी …ऑल इज़ वेल!

Sushmita Mukherjee

Rajya Sabha Election : झारखंड की राज्यसभा राजनीति में आखिरकार वह क्षण आ ही गया, जब सारे संशय, आपत्तियां और हंगामे धरे के धरे रह गए। परिमल नाथवानी का नामांकन मंजूर हो गया है। अब मुकाबला दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवारों के बीच है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में कुछ लोग इसे मुकाबला कम और गणित का प्रैक्टिकल एग्जाम ज्यादा मान रहे हैं।

कांग्रेस नेताओं ने विधानसभा परिसर में जमकर हंगामा किया और परिमल नाथवानी के नामांकन को रद्द करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि कैंडिडेट का नाम कैसे बदल गया। कांग्रेस ने जितना शोर मचाया, उससे नामांकन तो नहीं रुका, हां कुछ देर के लिए माहौल जरूर गर्म हो गया। लेकिन अंततः वही हुआ जो नाथ पर भरोसा रखने वालों को पहले से पता था—नाथवानी को नाथ का आशीर्वाद मिल गया।

उधर डुमरी के विधायक जयराम महतो ने भी लोकतंत्र के मैदान में उतरने का फैसला कर लिया है। उनका कहना है कि वोट का बहिष्कार करना रणभूमि में पीठ दिखाकर भागने जैसा है। अब वे किसे वोट देंगे, इसका खुलासा उन्होंने नहीं किया है। हालांकि झारखंड की राजनीति में कई बार वोट डालने से पहले ही वोट की दिशा हवा में तैरने लगती है।

इस बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दिल्ली रवाना हो रहे हैं। 11 जून को नीति आयोग की बैठक के दौरान उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात होगी। मुलाकात के दौरान वे मोदी जी को देश के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने की बधाई भी देंगे। माहौल पूरी तरह सौहार्दपूर्ण बना रहे, इसलिए मुख्य सचिव अविनाश कुमार भी साथ रहेंगे। राजनीति में संदेश कई बार शब्दों से नहीं, तस्वीरों से दिया जाता है।

दूसरी ओर नाथवानी कैंप पूरी तरह निश्चिंत दिखाई दे रहा है। वहां जीत को लेकर उतनी ही चिंता है जितनी जून की गर्मी में रांची में बर्फबारी की होती है। दावा है कि सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं और परिणाम सिर्फ औपचारिकता भर है।
अब अगर किसी की धड़कनें बढ़ी हुई हैं तो वे कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा के समर्थकों की हैं। उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती विरोधियों को हराना नहीं, बल्कि अपने 16 के 16 वोटों को सुरक्षित मतदान केंद्र तक पहुंचाना है।

वैसे प्रणव झा के लिए पैरवी कर हेमंत सोरेन को मनाने वाले भूपेश बघेल फिलहाल मध्य प्रदेश में अपनी ही राजनीतिक आग बुझाने में व्यस्त बताए जा रहे हैं। वहां मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद माहौल कुछ ऐसा है मानो किसी ने पुराने फिल्मी अंदाज में घोषणा कर दी हो—”भरतपुर लूट गया, हाय मोरी अम्मा!”
मीनाक्षी नटराजन अदालत का दरवाजा जरूर खटखटाएंगी, लेकिन राजनीतिक जानकार मजाक में कह रहे हैं कि जब तक फैसला आएगा, तब तक राज्यसभा सदस्य शायद विदाई भाषण देने की तैयारी कर रहे होंगे।

और आखिर में बात प्रणव झा की। झारखंड आने से पहले बहुत से लोग पूछ रहे थे—”कौन प्रणव झा?” राजनीति बड़ी निर्मम होती है। चुनाव खत्म होने के एक-दो महीने बाद भी अगर यही सवाल पूछा जाए तो किसी को हैरानी नहीं होगी।
फिलहाल राज्यसभा चुनाव का निष्कर्ष यही है—परिमल नाथवानी कैंप में ‘ऑल इज़ वेल’ बज रहा है, जबकि बाकी दल अभी भी गणित की कॉपी में सही जवाब खोज रहे हैं।

Share This Article
Leave a Comment