Hormuz Strait : 36 घंटे… बस इतने ही समय तक चली वो ऐतिहासिक डील, जिसे डोनाल्ड ट्रंप अपनी सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत बता रहे थे। G-7 समिट में कांपते हाथों से जिस समझौते पर हस्ताक्षर हुए, अब उसी समझौते को ईरान ने लगभग ठुकरा दिया है। नतीजा—दुनिया की सबसे अहम तेल धमनी होर्मुज स्ट्रेट पर फिर से ‘ताला’ लग गया और पश्चिम एशिया एक बार फिर युद्ध की दहलीज पर खड़ा दिखाई दे रहा है।
ईरान का साफ कहना है कि समझौते की पहली शर्त का ही उल्लंघन हो गया। जब इजराइल ने दक्षिणी लेबनान पर हमले नहीं रोके तो फिर ईरान समझौते का पालन क्यों करे? इसी के साथ IRGC ने चेतावनी जारी कर दी—”कोई भी जहाज होर्मुज पार करने की गलती न करे।”
यह वही होर्मुज है, जिसे समझौते के तहत वैश्विक व्यापार के लिए खोला गया था। तय हुआ था कि शुरुआती 60 दिनों तक ईरान किसी जहाज से टैक्स या टोल नहीं वसूलेगा, लेकिन अब पूरा फार्मूला ध्वस्त होता नजर आ रहा है।
ट्रंप ने जवाब में कहा कि ईरान को अब एक भी डॉलर नहीं मिलेगा और तेहरान पर कड़ी चेतावनी भी दी। लेकिन ईरान पीछे हटने को तैयार नहीं है। उसका दावा है कि होर्मुज पर नियंत्रण उसका अधिकार है और भविष्य की पूरी व्यवस्था ओमान सल्तनत के साथ मिलकर तय की जाएगी।
ईरान पहले ही Persian Gulf Strait Authority (PGSA) बना चुका है। योजना है कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के लिए परमिट, सुरक्षा शुल्क और नेविगेशन सर्विस फीस लागू की जाए। यानी दुनिया की सबसे व्यस्त समुद्री लाइफलाइन पर ईरान प्रशासनिक नियंत्रण और आर्थिक अधिकार दोनों चाहता है।
यहीं से अमेरिका के भीतर भी मतभेद सामने आ गए। ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पहले ही कह चुके हैं कि होर्मुज एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है, जहां फ्री पैसेज का सिद्धांत लागू होता है। दूसरी ओर सऊदी अरब, यूएई और वैश्विक शिपिंग इंडस्ट्री भी ईरान के प्रस्ताव का खुलकर विरोध कर रहे हैं। उनका डर है कि अगर ईरान को यह अधिकार मिला तो दुनिया के बाकी समुद्री मार्गों पर भी इसी तरह की मिसाल कायम हो जाएगी।
स्थिति तब और बिगड़ गई जब ईरान ने स्विट्जरलैंड वार्ता के लिए अपने प्रतिनिधिमंडल का दौरा रद्द कर दिया और होर्मुज पर बारूदी बैरियर लगा दिए। संदेश साफ था—जब तक लेबनान में इजराइली हमले नहीं रुकेंगे, तब तक कोई वार्ता नहीं होगी।
यानी जिस डील को ट्रंप अपनी कूटनीतिक जीत बता रहे थे, वह महज 36 घंटे में संकट में फंस गई। अब एक बार फिर तेल बाजार, वैश्विक व्यापार और पूरी दुनिया की निगाहें होर्मुज स्ट्रेट पर टिक गई हैं। अगर तनाव और बढ़ा तो असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था इसकी चपेट में आ सकती है।