BRICS : दुनिया की बदलती ताकतों के बीच अगले हफ्ते भारत की राजधानी दिल्ली एक ऐसे कूटनीतिक मंच की मेजबानी करने जा रही है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर होगी। सबसे बड़ी बात यह है कि इस बैठक में रूस, चीन और ईरान—वे तीन देश जिन्हें अमेरिका अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती मानता है—एक ही टेबल पर बैठेंगे, और उनकी अगुवाई करेगा भारत।
22-23 जून को दिल्ली में होने वाली BRICS देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक सिर्फ एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन का बड़ा संकेत मानी जा रही है। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया युद्ध की आग में झुलस रहा है और अमेरिका कई मोर्चों पर दबाव झेल रहा है, भारत का यह कूटनीतिक कदम वॉशिंगटन की बेचैनी बढ़ा सकता है।
एक मंच पर जुटेंगे अमेरिका के तीन बड़े प्रतिद्वंद्वी
बैठक में चीन के विदेश मंत्री वांग यी, रूस की सुरक्षा परिषद के प्रमुख सर्गेई शोइगु और ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के उप सचिव नेजामीपोर शामिल होंगे। इन नेताओं की मेजबानी और पूरी बैठक का नेतृत्व भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल करेंगे।
क्यों चुभता है BRICS अमेरिका को?
BRICS आज सिर्फ एक संगठन नहीं, बल्कि पश्चिमी देशों के दबदबे को चुनौती देने वाला सबसे बड़ा वैश्विक मंच बन चुका है। अमेरिका लंबे समय से आशंकित रहा है कि BRICS देश डॉलर के विकल्प और नई आर्थिक व्यवस्था पर काम कर रहे हैं, जिससे अमेरिकी प्रभाव कमजोर पड़ सकता है।
हालांकि दिल्ली बैठक के आधिकारिक एजेंडे में डॉलर का मुद्दा शामिल होगा या नहीं, यह अभी साफ नहीं है। लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि चीन और रूस अमेरिका पर दबाव बनाने की रणनीति पर चर्चा कर सकते हैं। वहीं अमेरिकी प्रतिबंधों और हमलों से जूझ रहा ईरान भी इस मंच का इस्तेमाल अपने रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने के लिए कर सकता है।
भारत का स्पष्ट संदेश—न किसी के दबाव में, न किसी के खेमे में
दिल्ली में इस अहम बैठक की मेजबानी कर भारत एक बार फिर दुनिया को यह संदेश देगा कि उसकी विदेश नीति किसी एक शक्ति केंद्र के इर्द-गिर्द नहीं घूमती। भारत अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले लेता है और वैश्विक मंचों पर स्वतंत्र तथा संतुलित भूमिका निभाने में विश्वास रखता है।
अब दुनिया का एजेंडा तय कर रहा है भारत
2023 की G20 अध्यक्षता से लेकर BRICS, SCO और ग्लोबल साउथ की आवाज बनने तक भारत ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अपनी नई पहचान बनाई है। आज हालात ऐसे हैं कि वैश्विक कूटनीति का शायद ही कोई बड़ा मंच हो, जहां भारत केंद्र में न हो।
दिल्ली में होने वाली यह बैठक सिर्फ BRICS की बैठक नहीं, बल्कि बदलती विश्व व्यवस्था का संकेत भी है—जहां भारत अब दर्शक नहीं, बल्कि निर्णायक भूमिका निभाने वाले देशों की पहली कतार में खड़ा दिखाई दे रहा है।