TMC : क्या फिर हिलेगा ‘दीदी’ का किला? 800 मीटर की दूरी से TMC को ‘टाटा-बाय-बाय’ कहने की तैयारी!

Bindash Bol

TMC : पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों ड्रामा रुकने का नाम ही नहीं ले रहा। तृणमूल कांग्रेस (TMC) का जहाज लगातार हिचकोले खा रहा है और ऐसा लगता है कि ममता बनर्जी के अपने ही खेमे से एक और ‘मुसाफिर’ बोरिया-बिस्तर समेटने के मूड में है!

​पूर्व मंत्री और वरिष्ठ TMC नेता शशि पांजा लगातार दूसरे दिन अपनी ही बागी पूर्व साथी—और अब NCPI सांसद—काकोली घोष दस्तीदार के क्लिनिक पर हाजिरी लगाने पहुंच गईं। सबसे मसालेदार बात? यह ‘गुप्त-गू’ ममता बनर्जी के कालीघाट वाले आवास से महज 800 मीटर की दूरी पर हुई। मतलब, नाक के ठीक नीचे बगावत की खिचड़ी!

‘मुझे जाना है!’ — क्लिनिक से बाहर, या पार्टी से बाहर?

​जब पत्रकारों ने शशि पांजा को क्लिनिक के बाहर घेर लिया और सीधा तीखा सवाल दागा—”क्या TMC का झंडा उतारने और ममता का साथ छोड़ने की तैयारी है?”—तो मैडम ने कोई साफ इनकार नहीं किया। एक रहस्यमयी मुस्कान के साथ सिर्फ तीन शब्द फेंके…

​”मुझे जाना है।”

​अब राजनीति की एबीसीडी समझने वाला बच्चा भी जानता है कि इस ‘मुस्कान’ और ‘जाना है’ का असली मतलब क्या है। सवाल यह है कि शशि पांजा को सिर्फ क्लिनिक से घर जाना था, या फिर TMC को हमेशा के लिए अलविदा कहकर बागी ब्रिगेड में शामिल होना था?

“अरे, हम तो पुराने दोस्त हैं!” — बगावत छिपाने की घिसी-पिटी दलील

​जब-जब राजनीति में किसी नए बवंडर की बू आती है, नेताओं के पास ‘दोस्ती और डॉक्टरी’ का पर्चा तुरंत तैयार मिलता है। बगावत का झंडा उठाकर NDA के पाले में जा चुकीं काकोली घोष दस्तीदार ने मामले पर लीपापोती करते हुए कहा—”अरे, हमारे तो 3 दशक पुराने रिश्ते हैं, यह तो बस डॉक्टरी पेशा है!”
​अब ममता बनर्जी के घर से 800 मीटर दूर बार-बार कौन सा ‘इलाज’ चल रहा है, यह बंगाल की जनता और दीदी दोनों बहुत अच्छे से समझ रहे हैं।

TMC में महा-बिखराव: 20 सांसद पहले ही छू-मंतर, अब अगली बारी किसकी?

​ममता बनर्जी का किला ताश के पत्तों की तरह ढह रहा है और आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं…

* ​20 लोकसभा सांसद बगावत कर चुके हैं: TMC से टूटकर इन नेताओं ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) बनाई और सीधे NDA के साथ हाथ मिला लिया।

* ​NDA की बैठक में मौजूदगी: ये बागी नेता बाकायदा NDA संसदीय दल की बैठक में जाकर अपनी वफादारी की मुहर भी लगा चुके हैं।

* ​कतार में कई और चेहरे: चर्चा गर्म है कि कई और दिग्गज नेता बस सही मौके का इंतजार कर रहे हैं।

​तृणमूल कांग्रेस में अब वफादारी कम और ‘भागम-भाग’ ज्यादा दिख रही है। देखना दिलचस्प होगा कि शशि पांजा का यह “मुझे जाना है” ममता बनर्जी को कितना बड़ा झटका देता है और दीदी इस टूटते जहाज को कैसे बचाती हैं!

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