आलोक नंदन
Rahul Gandhi : सिस्टम खत्म, टाटा, बाय-बाय! प्रयागराज के केपी ग्राउंड से राहुल गांधी ने बड़े आत्मविश्वास के साथ सिस्टम की विदाई की बात की। अब वह पप्पू नहीं रहे, पप्पा बन गए हैं। तकरीबन दो दशक से उनको पप्पू साबित करने के लिए निरंतर व्यवस्थित तरीके से अभियान चलाया जा रहा था। प्रयागराज की सभा में राहुल गांधी ने उसे पूरे तिलस्म को चूर-चूर कर दिया। सटीक प्रेजेंटेशन और कुशल मंच संचालन अचंभित करने वाला था। वे एंकर और एंकर्निया जो पिछले दो दशक से राहुल गांधी पर विभिन्न तरीके से तंज करते आ रहे हैं उन्हें भी राहुल गांधी के जर्नलिस्टिक स्किल को देखकर के दांतो तले उंगली दबानी पड़ रही है। मंच पर युवाओं से संवाद स्थापित करने के दौरान लगातार हुए उनसे प्रश्न कर रहे थे, शिक्षा को लेकर के, शिक्षा पर आने वाले खर्च को लेकर के, सिस्टम से उनकी उम्मीदों को लेकर के, और भी कई तरह के प्रश्न। एक कुशल मजे हुए एंकर की तरह उन्हें कभी छात्रों को बाधित नहीं किया, किसके विपरीत जब वे छात्र बीच-बीच में नर्वस हो रहे थे तो उनको प्रोत्साहित करते रहे, अपनी बात कहने के लिए। कहा जा सकता है कि सब कुछ प्रायोजित था, यदि ऐसा है तो यह समझ जाना चाहिए कि कम्युनिकेशन के क्षेत्र में राहुल गांधी अच्छे-अच्छे एंकर और एंकर्नियो का कान काटने लगे हैं।
भाषण के प्रारंभ में अपने संबोधन को उन्होंने मुक्त तीन बिंदुओं पर केंद्रित रखा युवा, डाटा और 21वीं शताब्दी। इसके साथ ही उन्होंने कॉरपोरेट और सत्ता के बीच में तालमेल के साथ-सा द शैक्षणिक संस्थाओं के भगवाकरण के मसले पर भी खुला बोला। महज 12 साल में कैसे अदानी की संपत्ति में 30 गुना का इजाफा हुआ, और कैसे बीजेपी डेढ़ सौ करोड़ से सीधे 10000 करोड़ की पार्टी में बदल गई। शैक्षणिक संस्थानों में कैसे आरएसएस के नुमाइंदों को बैठक के देश की युवा पीढ़ी के दिमाग को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है, अपने संवाद में इन तमाम बातों को राहुल गांधी छेड़ते रहे हैं। सभा में मौजूद युवा राहुल गांधी के हर बात पर शोर मचा करके अनुमोदन कर रहे थे। उनके जोशीले शोर थमने का नाम ही नहीं ले रहा था।
मंच पर से पटना के छात्रों को भी बोलने का मौका मिला। खुद राहुल गांधी उनका इंटरव्यू कर रहे थे उनसे उनकी बातें पूछ रहे थे, उनकी समस्याओं के बारे में पूछ रहे थे और वे खुलकर बात भी रहे थे। वे बता रहे थे कि कैसे पटना में पुलिस उनका दमन करती रही, कैसे जमीन बेच करके वे बीएडड की डिग्री लिए, और कैसे 4 साल से उन्हें नौकरी के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। राहुल गांधी खुद को बड़े तरीके से देश के युवाओं के साथ कनेक्ट कर रहे हैं, और यह निश्चित तौर से गुजरात लॉबी के लिए परेशानी का सबब है।
जंतर मंतर पर कॉकरोच आंदोलन के बाद से देश के शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा के साथ प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी की चमक फीकी पड़ी है। डैमेज कंट्रोल करने के लिए उन्होंने भले ही देश के युवाओं के साथ इंस्टाग्राम के जरिए संवाद स्थापित करने की कोशिश की, लेकिन यह असरअंदाज नहीं रहा। इसके विपरीत उनकी शैली को अपनाते हुए नए तरीके से मीम और रील बना करके उनकी लानत मलानत की जाती रही। कॉकरोच आंदोलन ने उनकी कमर पर चोट किया है उठने में थोड़ा वक्त लगेगा। प्रारंभ से ही कॉकरोच आंदोलन का भरपूर राजनीतिक फायदा राहुल गांधी उठाते आ रहे हैं। इस मुद्दे को उन्होंने संसद के बाहर भी उठाया, नरेंद्र मोदी के आवास का घेराव भी किया और छात्रों की गूंज प्रोग्राम के जरिए देश के युवाओं के साथ लगातार संवाद भी करते रहे। देश के युवा राहुल गांधी की ओर आकर्षित हो रहे हैं। प्रयागराज में तो छात्राओं की भीड़ उम्मीद से कहीं ज्यादा थी।
मजे की बात है कि राहुल गांधी से निपटने के लिए अभी भी बीजेपी का मीडिया सेल अपने पुराने हथकंडों को ही अपनाये हुए हैं। कारपोरेट मीडिया के एंकर और रिपोर्टर घिसे पीटे अंदाज में राहुल गांधी को पुराने फार्मूले के तहत ही घेराबंदी की कोशिश में लगे रहते हैं, जबकि राहुल गांधी मंच पर से डिजिटल स्क्रीन का इस्तेमाल करते हुए उनके स्क्रीन की तुलना में अपने प्रेजेंटेशन को कई गुना बेहतर बना चुके हैं।
इसमें कोई शक नहीं है कि भाजपा से युवा पीढ़ी तेजी से छिटक रही है। भाजपा का हिंदूवादी ब्रांड देश के युवाओं को नहीं भा रहा है, जबकि भाजपा की पुरानी राम मंदिर आंदोलन वाली पीढ़ी अभी भी नॉस्टैल्जिया से बाहर निकाल कर के नहीं सोच पा रही है। यही वजह है कि कॉकरोच आंदोलन में शामिल युवाओं को भी उन्होंने राष्ट्रद्रोही का दर्जा देना शुरू कर दिया था। यहां तक इस आंदोलन में शामिल लड़कियों को भी डराने धमकाने से बात नहीं आ रहे थे। देश के जेन जी पर इसका उलटा असर पड़ा है। सिस्टम के खिलाफ उनके मन में व्याप्तआक्रोश में और इजाफा हुआ है। यही वजह है कि जब प्रयागराज में राहुल गांधी सिस्टम खत्म, टाटा, बाय-बाय बोल रहे हैं तो उन्हें नई पीढ़ी का भरपूर समर्थन मिल रहा है। अभी वक्त है, इसके पहले कि यह हवा प्रचंड आंधी में तब्दील हो जाए, बीजेपी को खुद में आमूल चूल परिवर्तन करना होगा।