UNGA : संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच पर तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने एक बार फिर अपनी आदत से लाचार होकर कश्मीर का मुद्दा उठा दिया। बिना मांगे सलाह देने की अपनी पुरानी आदत दोहराते हुए एर्दोगन ने दावा किया कि कश्मीर समेत दक्षिण एशिया के विवादों को बातचीत और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।
लेकिन, भारत ने उनकी इस बचकानी हरकत पर करारा और दोटूक जवाब देते हुए उनका भ्रम तुरंत दूर कर दिया!
भारत की दोटूक: किसी तीसरे की दलाली बर्दाश्त नहीं!
भारत ने तुर्की के इस बेतुके बयान पर तीखी आपत्ति जताते हुए साफ कर दिया है कि कश्मीर पूरी तरह से भारत और पाकिस्तान के बीच का द्विपक्षीय मामला है। इसमें किसी तीसरे देश या बाहरी ताकत की मध्यस्थता या दखलअंदाजी की कोई जरूरत नहीं है, और ना ही यह कभी स्वीकार्य होगा।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि कश्मीर पर भारत का रुख अटूट, स्पष्ट और अपरिवर्तित है। भारत ने बार-बार दुनिया को यह बता दिया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख देश के अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं, जिन पर बाहरी किसी भी बयानबाजी का कोई असर नहीं पड़ता।
बाज नहीं आ रहे एर्दोगन: हर साल बेइज्जती कराने की पुरानी बीमारी
एर्दोगन की यह कोई पहली हरकत नहीं है। हर साल यूएनजीए (UNGA) का मंच मिलते ही वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बेतुकी बयानबाजी करने से बाज नहीं आते। पिछले साल भी उन्होंने ऐसा ही ओछा प्रयास किया था, जिसके बाद भारत ने उन्हें कड़ा संदेश दिया था।
तुर्की के राष्ट्रपति शायद यह भूल चुके हैं कि भारत अपने आंतरिक मामलों में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को कभी बर्दाश्त नहीं करता। एर्दोगन की यह बयानबाजी केवल और केवल अंतरराष्ट्रीय मंच पर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का एक ढकोसला मात्र है, जिसे भारत हर बार की तरह इस बार भी पूरी ताकत और सख्ती से खारिज कर चुका है।
