Azamgarh Mass Murder : “जब अंधविश्वास दिमाग पर इस कदर हावी हो जाए कि घर का आंगन अपनों के ही खून से लाल हो जाए… तो इंसान और दरिंदे में कोई फर्क नहीं रह जाता।”
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गहजी गांव में जो कुछ हुआ, वह किसी हॉरर फिल्म की कहानी नहीं बल्कि हकीकत का एक खौफनाक मंजर है।
खौफनाक वारदात के मुख्य बिंदु
* 5 जिंदगियां खत्म: अंधविश्वास और सनक के खेल में कुल 5 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई।
* खून से सनी शाम: आरोपी अरविंद सिंह ने अपनी लाइसेंसी बंदूक से पत्नी और दो पंडितों को गोलियों से भून डाला।
* मासूमों को बनाया बंधक: ट्रिपल मर्डर के बाद आरोपी ने अपने ही 3 छोटे बच्चों को कमरे में बंधक बना लिया और एक बच्चे को गोली मार दी।
* कमांडो ऑपरेशन और एनकाउंटर: आधी रात को विशेष कमांडो दस्ते ने मोर्चा संभाला और क्रॉस-फायरिंग में आरोपी ढेर हो गया।
कहानी की जड़: मानसिक विक्षिप्तता और अंधविश्वास का जहर
पुलिस जांच और परिजनों के मुताबिक, आरोपी अरविंद सिंह का पिछले कुछ समय से बनारस के एक अस्पताल में मानसिक रोग का इलाज चल रहा था। लेकिन परिवार ने डॉक्टर के पर्चे की बजाय ‘भूत-प्रेत’ और ‘भाई की आत्मा’ पर ज्यादा भरोसा किया।
परिवार को यह अंधविश्वास था कि अरविंद के ऊपर उसके मृतक बड़े भाई सुनील सिंह की आत्मा का साया है। इसी साये को भगाने के लिए उसकी मां समला देवी (70) और पत्नी बबीता सिंह (40) ने घर में 4 दिन का विशेष तंत्र-मंत्र और पूजा-पाठ का आयोजन रखा था। बुधवार को इस अनुष्ठान की पूर्णाहुति होनी थी, लेकिन उससे पहले ही मौत का तांडव शुरू हो गया।
मंगलवार शाम: जब पूजा का मंडप बना श्मशान
मंगलवार शाम करीब 6 बजे जब अरविंद बाजार से घर लौटा और आंगन में तांत्रिक अनुष्ठान होते देखा, तो उसका मानसिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया। वह चीख उठा— “तेरे चक्कर में मेरे भाई की हत्या हुई है!”
इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, उसने अपनी लाइसेंसी बंदूक निकाली और तबाही मचा दी…
* सबसे पहले अपनी पत्नी बबीता सिंह को गोली मारी।
* इसके बाद पूजा करा रहे दो पुरोहितों— महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा को ताबड़तोड़ गोलियों से भून डाला।
7 घंटे का खौफ: कमांडो ऑपरेशन और दर्दनाक अंत
ट्रिपल मर्डर को अंजाम देने के बाद सनकी अरविंद ने अपने 3 मासूम बच्चों को एक कमरे में खींचकर अंदर से बंद कर लिया। मौके पर 6 थानों की पुलिस, एसपी और भारी फोर्स पहुंच गई। पुलिस ने करीब 7 घंटे तक उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन मानसिक रूप से बीमार अरविंद लगातार धमकियां देता रहा।
* मासूम पर चलाई गोली: तमाम चेतावनियों को दरकिनार करते हुए उसने कमरे के भीतर ही अपने 4 साल के मासूम बेटे को गोली मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया।
* आधी रात कमांडो एंट्री: बच्चों की जान खतरे में देख रात 12:30 बजे वाराणसी जोन के विशेष कमांडो दस्ते ने मोर्चा संभाला।
* मुठभेड़: सरेंडर करने के बजाय अरविंद ने कमांडो टीम पर 6 राउंड ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस और कमांडो की गोली से आरोपी अरविंद गंभीर रूप से घायल हो गया।
अस्पताल में टूटा सांसों का तांता
पुलिस ने दरवाजा तोड़कर बाकी 2 मासूम बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जबकि घायल आरोपी अरविंद और उसके गोली लगे मासूम बेटे को तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया गया। लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद आरोपी अरविंद सिंह और उसके मासूम बच्चे दोनों की इलाज के दौरान मौत हो गई।
इस तरह, एक अंधविश्वास और एक सिरफिरे की सनक ने एक हंसते-खेते परिवार को पूरी तरह से तबाह कर दिया। फिलहाल, मौके पर फॉरेंसिक और SOG टीम साक्ष्य जुटाने में जुटी है और इस पूरे खौफनाक घटनाक्रम की गहराई से जांच की जा रही है।
