Chandra Grahan on Rakhi: बहनें किस समय बांधें राखी? जानें ग्रहण के दिन कौन सा है शुभ मुहूर्त

Bindash Bol

Chandra Grahan on Rakhi: रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण के साये को लेकर यदि आपके मन में संशय है, तो शास्त्रों और पंचांग के नियमों के अनुसार सही समय का चयन करना बेहद जरूरी है। ज्योतिष मान्यताओं के मुताबिक, ग्रहण और सूतक काल के दौरान रक्षासूत्र बांधना पूरी तरह वर्जित माना गया है।

​यदि भारत में ग्रहण दृश्यमान नहीं है, तो उसका सूतक काल भी प्रभावी नहीं होगा। ऐसे में रक्षाबंधन का सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 5:57 बजे से लेकर सुबह 9:48 बजे तक रहेगा।

सूतक से पूर्व का सबसे उत्तम मुहूर्त

* ​प्रातः काल की श्रेष्ठता: यदि ग्रहण रात्रि में हो, तो सुबह सूतक लगने से पहले का समय राखी बांधने के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

* ​सकारात्मक ऊर्जा: धर्मसिंधु के अनुसार, सूतक पूर्व का वातावरण शुद्ध और शांत होता है। इस समय रक्षासूत्र बांधने से भाई को दीर्घायु और सुरक्षा कवच का आशीर्वाद मिलता है।

* ​नियम: सूतक काल प्रभावी होने के बाद किसी भी प्रकार के मांगलिक व धार्मिक कार्य करने से बचना चाहिए।

ग्रहण समाप्ति और मोक्ष के बाद के नियम

* ​शुद्धिकरण: यदि ग्रहण दिन में समाप्त होता है, तो मोक्ष काल के बाद स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

* ​पूजा स्थल की सफाई: घर के मंदिर और पूजा स्थल का गंगाजल से शुद्धिकरण करने के बाद ही पूजा-थाल सजाएं।

* ​दोषमुक्ति: ग्रहण समाप्ति के बाद विधिवत स्नान और दान करके राखी बांधना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

भद्रा और ग्रहण मुक्त समय का चयन

* ​दोषमुक्त काल: रक्षाबंधन पर केवल ग्रहण ही नहीं, बल्कि भद्रा काल का त्याग करना भी अनिवार्य है।

* ​शुभ फल की प्राप्ति: भद्रा और सूतक दोनों से मुक्त समय में बांधी गई राखी भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत बनाती है और जीवन में सुख-समृद्धि लाती है।

​अस्वीकरण: यह जानकारी सामान्य धार्मिक मान्यताओं और पंचांगीय गणनाओं पर आधारित है।

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