Changes in Sangh : भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अगुवाई वाली नई टीम के गठन के बाद अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में भी बड़े संगठनात्मक बदलावों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बदलती सामाजिक परिस्थितियों और नई पीढ़ी (Gen Z व Gen Alpha) के मिजाज को साधने के लिए संघ अपने संगठनात्मक ढांचे को नया रूप देने की तैयारी कर रहा है।
1. बीजेपी का नया मॉडल: युवा नेतृत्व को फैसले की खुली छूट, अनुभवी संभालेंगे मार्गदर्शन
बीजेपी ने सत्ता में रहते हुए संगठनात्मक स्तर पर पीढ़ीगत बदलाव की एक नई मिसाल पेश की है।
* पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन की 65 सदस्यीय नई टीम में 51 नए चेहरों और युवाओं को प्राथमिकता दी गई है, साथ ही अनुभवी नेताओं को भी जोड़कर संतुलन बनाया गया है।
* इस बदलाव का सबसे अहम पहलू यह है कि नए नेतृत्व को रोजमर्रा के संगठनात्मक और रणनीतिक फैसले लेने में पहले से कहीं अधिक स्वायत्तता दी गई है।
* वरिष्ठ नेताओं की भूमिका अब मुख्य रूप से रणनीतिक मार्गदर्शन और परामर्श तक सीमित रहेगी।
2. 90 के दशक की याद: जब युवा चेहरों को मिली थी कमान
बीजेपी के इतिहास में यह बदलाव अभूतपूर्व नहीं है। वर्ष 1980 में पार्टी गठन के बाद से हर दशक में बड़े फेरबदल देखे गए हैं।
* 1990 के दशक में तत्कालीन नेतृत्व ने कई युवा नेताओं को केंद्रीय भूमिका में उतारा था, जिनमें नरेंद्र मोदी भी प्रमुख थे।
* मौजूदा दौर में फर्क सिर्फ इतना है कि यह पीढ़ीगत बदलाव केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सक्रिय छत्रछाया में आगे बढ़ रहा है।
3. संघ में बदलाव के संकेत: Gen Z और नई चुनौतियों पर नजर
बीजेपी के इस कदम के बाद मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अगले साल संघ के संगठनात्मक ढांचे में भी अहम परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं।
* नई पीढ़ी पर फोकस: डिजिटल युग, बदलती सामाजिक सोच और Gen Z/Gen Alpha के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए संघ युवा वर्ग से जुड़ाव की रणनीति पर काम कर रहा है।
* जमीनी स्तर पर युवा शक्ति: शाखाओं, सेवा प्रकल्पों और वैचारिक संवाद में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए युवा प्रचारकों और स्वयंसेवकों को अधिक जिम्मेदारी दी जा सकती है।
4. सरसंघचालक मोहन भागवत को लेकर क्या है स्थिति?
संगठन में बदलाव की चर्चाओं के बीच संघ प्रमुख के पद को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट है….
* पद पर कोई बदलाव नहीं: डॉ. मोहन भागवत मार्च 2009 से निरंतर सरसंघचालक का दायित्व संभाल रहे हैं और इस पद पर किसी बदलाव की कोई चर्चा नहीं है।
* संघ की परंपरा: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में सरसंघचालक का कोई चुनावी मुकाबला नहीं होता; यह पद परंपरा और सर्वानुमति के आधार पर तय होता है।
* भूमिका: शीर्ष स्तर पर मोहन भागवत वैचारिक दिशा और नीतिगत मार्गदर्शन की धुरी बने रहेंगे, जबकि युवा नेतृत्व जमीनी स्तर पर संगठन के विस्तार और कार्यशैली को गति देगा।
