Diwali 2026 : दीपावली को लंका विजय कर चौदह वर्षों के बनवास के बाद श्री राम की सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या वापसी का उत्सव माना जाता है, लेकिन आश्चर्य यह है कि इस दिन राम की नहीं, देवी लक्ष्मी और गणेश की पूजा होती है। इसके पीछे पुराणों की कथा है कि समुद्र मंथन में देवी लक्ष्मी के मिलने के बाद उन्हें पाने के लिए देवों और असुरों के बीच विवाद हो गया था। वह कार्तिक मास की अमावस्या की रात थी जब लक्ष्मी ने पति के रूप में विष्णु का वरण कर इस विवाद का अंत किया था। संभवतः उसी रात की स्मृति में लक्ष्मी की पूजा होती है। पूछा जाता है कि लक्ष्मी की पूजा में उनके साथ गणेश को क्यों शामिल किया जाता है। इसका कारण यह है कि जल से प्रकट होने के कारण धन-संपदा की देवी लक्ष्मी को चंचला माना गया है। गणेश बुद्धि और विवेक के प्रतीक देवता हैं। विवेक रूपी गणेश का साथ न हो तो धन-संपदा का दुरुपयोग और अंततः उसका नाश होता है। दीपावली के दिन लक्ष्मी के साथ गणेश की पूजा का संदेश यह है कि धन अर्जित अवश्य करें लेकिन उसका उपयोग संचय, विलासिता या वैभव के भोंडे प्रदर्शन में नहीं, बुद्धि और विवेक के साथ अपने और समाज के कल्याण में होना चाहिए। धन को अपने ऊपर कभी हावी न होने दें। धन जिसपर सवार हो जाय उसे शास्त्रों में उल्लू कहा गया है।
(पेंटिंग – सुमन वर्मा)