Abhishek Sharma : शुरुआत सुनामी जैसी, अंत मैराथन जैसा… फिर भी सुपरहिट रही पारी!

Bindash Bol

Abhishek Sharma : सच कहें तो इस मैराथन पारी के आखिरी पलों में थकान ने अभिषेक शर्मा के उन आक्रामक तेवरों पर ऐसी लगाम कसी कि उनके बल्ले से वो चिर-परिचित आसमानी छक्के निकलने बंद हो गए। शुरुआत में उन्होंने जिस खौफनाक और तूफानी अंदाज में दिल्ली कैपिटल्स के गेंदबाजों की बखिया उधेड़ी थी, अगर वही सुनामी आखिरी ओवरों तक जारी रहती, तो यकीन मानिए आज दिल्ली की टीम पौने तीन सौ रनों के किसी डरावने पहाड़ तले दब चुकी होती।

हालांकि, थकान की वजह से भले ही पारी के अंत में उनकी रफ्तार धीमी पड़ गई हो, लेकिन फिर भी उनका यह रौद्र रूप किसी भी अन्य बल्लेबाज की सबसे तूफानी पारी से इक्कीस ही साबित होगा। बस बात सिर्फ इतनी सी है कि अभिषेक ने पावर हिटिंग के मामले में खुद के लिए जो गगनचुंबी स्टैंडर्ड सेट कर दिए हैं, उस पैमाने पर शायद खुद उन्हें भी अपनी यह पारी परफेक्ट न लगे।

सिनेमा की दुनिया में एक बड़ा मशहूर फलसफा है कि कई बार फिल्म के क्लाइमेक्स में अगर हीरो अपनी जान कुर्बान कर दे, तो वो पिक्चर बॉक्स ऑफिस पर ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर बन जाती है। टी20 क्रिकेट का गणित भी कुछ-कुछ ऐसा ही है। जब कोई ओपनर बल्लेबाज पहली गेंद से मैदान पर डटा हो और डेथ ओवर्स तक आते-आते उस पर थकान हावी होने लगे, तो उसका आउट हो जाना ही टीम के लिए एक सुपरहिट क्लाइमेक्स साबित हो सकता है। इससे किसी फ्रेश और ऊर्जा से भरे पावरहिटर को क्रीज पर आने और बची हुई गेंदों पर बेरहमी से टूट पड़ने का मौका मिल जाता है। अगर अपना शतक पूरा करने के बाद अभिषेक अपना विकेट कुर्बान कर देते, तो शायद टीम के स्कोरबोर्ड के नजरिए से यह पारी और भी ज्यादा मारक नजर आती।

लेकिन फिर भी, दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ आई उनके आईपीएल करियर की इस दूसरी सेंचुरी का जश्न कम नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह शतक बिल्कुल उसी बेखौफ और विंटेज अंदाज में ठोका, जिसके लिए अब पूरी दुनिया उन्हें जानती है। महज 47 गेंदों में अपना शतक पूरा करके उन्होंने मैदान में जो आग लगाई थी, उसकी तपिश दिल्ली के डगआउट तक महसूस हो रही थी। एक वक्त था जब 51 गेंदों पर 115 रन बनाकर वो किसी एक्सप्रेस ट्रेन की तरह भाग रहे थे।

लेकिन इसके बाद अचानक उनके रनों के पहियों पर ब्रेक लग गया। इसकी वजह कुछ हद तक दिल्ली के गेंदबाजों की वापसी रही होगी, और बहुत हद तक अभिषेक की खुद की शारीरिक थकान। आंकड़े भी यही गवाही देते हैं कि अपनी पारी की आखिरी 17 गेंदों पर वो सिर्फ 20 रन ही जोड़ सके। लेकिन इन सब के बावजूद, अंत तक नाबाद रहते हुए 68 गेंदों पर 10 करारे चौकों और 10 गगनचुंबी छक्कों से सजी उनकी यह 135 रनों की पारी क्रिकेट के किसी भी दीवाने के लिए एक ऐसी ब्लॉकबस्टर ट्रीट थी, जिसे वो बार-बार देखना चाहेगा।

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