Asian Games: एशियन गेम्स 2026 (आइची-नागोया) के सातवें दिन भारत के लिए एक बेहद शानदार खबर सामने आई है। डिस्टेंस रनर सावन बरवाल ने पुरुषों की मैराथन स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के साथ ही भारत को एशियन गेम्स की मैराथन स्पर्धा में पूरे 44 साल के लंबे इंतजार के बाद कोई मेडल हासिल हुआ है। इससे पहले साल 1982 के नई दिल्ली एशियन गेम्स में भारत को इस इवेंट में मेडल मिला था।
रेस का रोमांच और नया नेशनल रिकॉर्ड
* शुरुआत: शनिवार, 26 सितंबर को दिन के पहले ही इवेंट (पुरुषों की मैराथन) में सावन ने शानदार शुरुआत की और रेस के अधिकांश समय तक पहले स्थान पर बढ़त बनाए रखी।
* गोल्ड से चूके, पर रचा इतिहास: अंत के कुछ किलोमीटर में वह थोड़े पिछड़ गए और मात्र 48 सेकंड के अंतर से गोल्ड मेडल से चूक गए, लेकिन अपनी जबर्दस्त मानसिक मजबूती दिखाते हुए उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम कर लिया।
* खुद का रिकॉर्ड तोड़ा: भारतीय सेना में हवलदार सावन ने 2 घंटे 11 मिनट 37 सेकंड का समय निकालकर इसी साल अप्रैल में बनाया अपना ही नेशनल रिकॉर्ड तोड़ दिया।
मंडी से पोडियम तक: संघर्ष और प्रेरणादायक सफर
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले से ताल्लुक रखने वाले सावन का यहाँ तक का सफर बेहद संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायक रहा है….
* शुरुआत और सेना का सफर: स्कूली दिनों में बैडमिंटन खेलने वाले सावन का रुझान धीरे-धीरे रनिंग की तरफ बढ़ा। सीमित संसाधनों के चलते उन्होंने भारतीय सेना जॉइन की, जहाँ एक सीनियर ने उन्हें मैराथन में हाथ आजमाने की सलाह दी।
* करियर का टर्निंग पॉइंट: शुरुआती दौर में वह 5000 और 10,000 मीटर की दौड़ में उतरे, लेकिन बड़ी सफलता न मिलने पर उन्होंने मैराथन का रुख किया। इसके बाद रिलायंस फाउंडेशन स्पोर्ट्स ने उन्हें स्पॉन्सर किया, जिसके बाद उनकी ट्रेनिंग और प्रदर्शन में और निखार आया।
आगे की उम्मीदें
सावन बरवाल की इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने न केवल एशियन गेम्स में भारत का मान बढ़ाया है, बल्कि आने वाले ओलंपिक खेलों के लिए भी देश की उम्मीदों को पंख लगा दिए हैं। 44 साल के इस सूखे को खत्म करने के बाद अब सावन अपनी टाइमिंग को और बेहतर करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
