BRICS Business Forum : वैश्विक आर्थिक मंदी और व्यापारिक दीवारें चाहे जितनी ऊंची हों, भारत ने दुनिया के लिए उम्मीद और भरोसे का एक मजबूत पुल तैयार कर लिया है—यही संदेश था प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का, जो उन्होंने हाल ही में अब तक के सबसे बड़े ब्रिक्स बिजनेस फोरम के मंच से दुनिया के सामने रखा।
कभी महज 4 देशों से शुरू हुआ यह सफर आज 21 देशों के एक विशाल वैश्विक परिवार में तब्दील हो चुका है। ब्रिक्स देश आज दुनिया की 50% आबादी और 40% जीडीपी का प्रतिनिधित्व करते हैं। पीएम मोदी के आंकड़ों पर गौर करें तो दुनिया की जीडीपी जहां पिछले कुछ सालों में लगभग ढाई गुना बढ़ी है, वहीं ब्रिक्स देशों की कुल जीडीपी करीब साढ़े चार गुना छलांग लगा चुकी है। यानी ब्रिक्स की आर्थिक रफ्तार दुनिया के बाकी हिस्सों से लगभग दोगुनी तेजी से दौड़ रही है।
व्यापार की रुकावटों को तोड़ने का वक्त
आज जब दुनिया भर के देश ट्रेड बैरियर्स और आर्थिक दीवारों को खड़ा करने में लगे हैं, तब भारत दुनिया को जोड़ने का काम कर रहा है। पीएम मोदी ने दो टूक अंदाज में कहा कि साल 2014 से लेकर अब तक भारत ने करीब 40 देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) किए हैं। उनका यह आह्वान बिजनेस जगत के लिए साफ संकेत है कि अब कारोबार के रास्ते में आने वाले 10 बड़े अवरोधों और अड़चनों को मिलकर खत्म करने की जरूरत है, ताकि व्यापार की रफ्तार को और पंख लग सकें।
भारत की अध्यक्षता का मंत्र: ‘रेजिलिएंस, इनोवेशन और सस्टेनेबिलिटी’
भारत की ब्रिक्स चेयरमैनशिप की थीम ‘बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन, एंड सस्टेनेबिलिटी’ सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि देश की आर्थिक नीतियों की ठोस बुनियाद है। भारत ने इसे अपने विकास का आधार बनाया है…..
* भरोसेमंद सप्लाई चेन: एनर्जी से लेकर टेक्नोलॉजी तक, भारत ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी सप्लाई चेन को अधिक डाइवर्सिफाइड और भरोसेमंद बनाया है।
* बदलता इंफ्रास्ट्रक्चर: देश में सड़कों, रेलवे, पोर्ट्स और एयरपोर्ट्स का जाल तेजी से बिछाया जा रहा है।
* स्ट्रैटेजिक सेक्टर्स में छलांग: शिपबिल्डिंग, सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स और बायोटेक्नोलॉजी जैसे भविष्य के क्षेत्रों में भारत अपनी आत्मनिर्भरता और क्षमता दोनों बढ़ा रहा है।
* डिजिटल क्रांति का डंका: भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने फाइनेंशियल इनक्लूजन की परिभाषा बदल दी है। आज दुनिया के कुल रियल-टाइम पेमेंट्स का 50% हिस्सा अकेले इसी भारतीय तकनीक के दम पर हो रहा है।
स्टार्टअप्स और MSMEs के लिए सुनहरे मौके
छोटे कारोबारियों और युवाओं को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए भारत ने कई बड़े कदम उठाए हैं। ब्रिक्स प्रेसीडेंसी के तहत कृषि, स्वास्थ्य, स्किल्स और स्मार्ट ग्रिड जैसे क्षेत्रों में नए कोऑपरेशन नेटवर्क तैयार किए गए हैं। इसके अलावा ब्रिक्स इनक्यूबेटर नेटवर्क, ब्रिक्स MSME पोर्टल और ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड जैसी पहलें कारोबारियों, निवेशकों और टैलेंटेड युवाओं के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाली हैं।
ग्लोबल इनोवेशन और सॉल्यूशन के नए हब के तौर पर उभरते ब्रिक्स देशों के लिए पीएम मोदी का यह संबोधन केवल एक भाषण नहीं, बल्कि आने वाले कल की उस आर्थिक महाशक्ति का रोडमैप है, जहां सीमाएं छोटी और संभावनाएं असीम होने जा रही हैं।
