PM Modi Putin Meeting : कूटनीति की गर्मजोशी और सांस्कृतिक उपहार: भारत मंडपम में हुई प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की अहम मुलाकात

Bindash Bol

PM Modi Putin Meeting : ब्रिक्स समिट से पहले नई दिल्ली के आधुनिक भारत मंडपम में वैश्विक कूटनीति का एक अनूठा दृश्य देखने को मिला, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आपस में मिले। गर्मजोशी से गले मिलने और हाथ मिलाने के साथ शुरू हुई इस उच्चस्तरीय बैठक ने दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ संबंधों की एक बार फिर से नई मिसाल पेश की। इस मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति को तमिल संस्कृति के प्राचीन ग्रंथ ‘तिरुक्कुरल’ के रूसी भाषा में अनुवाद की एक प्रति भेंट की, जिसने इस कूटनीतिक संवाद में सांस्कृतिक जुड़ाव का एक सुंदर रंग भर दिया।

क्या है तिरुक्कुरल का महत्व?

​महान तमिल कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर द्वारा रचित ‘तिरुक्कुरल’ तमिल साहित्य की सबसे गौरवशाली और प्रतिष्ठित कृतियों में गिनी जाती है। इसमें 1,330 संक्षिप्त दोहे हैं, जो मानव जीवन के सबसे गहरे सत्यों को छूते हैं। इस ग्रंथ में नैतिकता, शासन कला, अर्थव्यवस्था, प्रेम, और इंसानी मूल्यों के साथ-साथ कृषि और किसानों के कल्याण जैसे विषयों पर भी अत्यंत विस्तृत और व्यावहारिक विचार प्रस्तुत किए गए हैं। पुतिन को यह उपहार देना भारतीय दर्शन और वैश्विक मानवता के साझा मूल्यों के प्रति भारत के सम्मान को दर्शाता है।

द्विपक्षीय वार्ता के मुख्य बिंदु

​एक साल के भीतर दोनों नेताओं की यह दूसरी मुलाकात थी (इससे पहले दिसंबर 2025 में दोनों नेता 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में मिले थे)। इस बार की बैठक में रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और व्यापार के पारंपरिक क्षेत्रों से लेकर भविष्य की रणनीतिक साझेदारियों तक व्यापक चर्चा हुई..

* ​आर्थिक और औद्योगिक सहयोग: रेल विकास, सुरंग निर्माण, और इस्पात मूल्य श्रृंखला (स्टील वैल्यू चेन) को विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। इसके अलावा, बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) अवसरों के विस्तार और रूसी बाजार में भारतीय कंपनियों की पैठ बढ़ाने पर सहमति बनी।

* ​ऊर्जा और श्रम साझेदारी: असैन्य परमाणु ऊर्जा सहयोग, ईंधन चक्र, रूस में कुशल भारतीय श्रमिकों की संख्या बढ़ाने, महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) में संयुक्त प्रयास और उर्वरक क्षेत्र में रणनीतिक उपक्रमों को मजबूत करने पर विमर्श हुआ।

* ​वैश्विक मुद्दे और शांति की पहल: दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया और ब्लैक सी क्षेत्र में जारी संघर्षों और उनके समुद्री व्यापार पर पड़ने वाले प्रभावों की समीक्षा की। प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर स्पष्ट शब्दों में दोहराया कि मौजूदा वैश्विक संकटों का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि केवल संवाद और कूटनीति के मार्ग से ही संभव है।

भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और तमाम वैश्विक

उथल-पुथल के बीच भारत और रूस की यह विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी लगातार सुदृढ़ हो रही है, और यह बैठक इसी अटूट भरोसे की एक मजबूत कड़ी साबित हुई है।

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