CBSE : 17 साल के छात्र के सवालों से हिला CBSE, मोदी सरकार की बड़ी कार्रवाई!

Bindash Bol

* CBSE का बड़ा एक्शन : हटाए गए चेयरमैन-सचिव, विवादित OSM टेंडर की होगी जांच ; पोर्टल पर साइबर अटैक

CBSE : देश के लाखों छात्रों और अभिभावकों के लिए अहम माने जाने वाले केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। बोर्ड के चेयरमैन और सचिव का तबादला कर दिया गया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर विवाद लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। कक्षा 12 के परिणामों के बाद मूल्यांकन प्रक्रिया पर उठे सवालों ने मामले को गंभीर बना दिया था। अब केंद्र सरकार ने न केवल शीर्ष अधिकारियों का तबादला किया है, बल्कि OSM सेवाओं की खरीद प्रक्रिया की भी जांच के आदेश दे दिए हैं।

PM मोदी खुद देख रहे हैं मामला

इस बैठक के बाद सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए CBSE के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का ट्रांसफर कर दिया। इस बैठक में OSM प्रणाली में गड़बड़ी का खुलासा करने वाले 12वीं के छात्र सार्थक सिद्धांत भी शामिल हुए थे। ऐसा पहली बार हुआ कि किसी मामले में कोई स्टूडेंट अपनी बात रखने के लिए पहुंचा। बताया जा रहा है OSM में गड़बड़ी के मामले पर PM मोदी की पूरी नजर है। संसद भवन एनेक्सी में हुई इस बैठक में छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों की ओर से उठाई गई शिकायतों और चिंताओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

क्या है OSM विवाद?

ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) वह डिजिटल प्रणाली है जिसके माध्यम से परीक्षकों द्वारा उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया जाता है। हाल के दिनों में कुछ छात्रों और शिक्षा विशेषज्ञों ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और तकनीकी मानकों को लेकर कई सवाल मौजूद हैं। कक्षा 12 के परिणाम घोषित होने के बाद कई छात्रों ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर चिंता जताई थी। इसी बीच OSM सेवाओं के चयन और खरीद प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठने लगे, जिसके बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।

17 वर्षीय छात्र के ब्लॉग ने बढ़ाई हलचल

इस पूरे विवाद को तब और बल मिला जब 17 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत ने अपने ब्लॉग में कुछ गंभीर आरोप लगाए। ब्लॉग में दावा किया गया कि हैदराबाद स्थित Coempt EduTeck को OSM प्रक्रिया का अनुबंध दिलाने के लिए नियमों में कथित तौर पर बदलाव किए गए। सार्थक सिद्धांत के इन दावों ने शिक्षा जगत और नीति निर्माताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। यही वजह रही कि यह मुद्दा संसद की एक समिति तक पहुंच गया।

संसदीय समिति ने भी की समीक्षा

मंगलवार को एक संसदीय पैनल ने पूरे विवाद की समीक्षा की। बैठक के दौरान विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई और मूल्यांकन प्रणाली से जुड़े सवालों को गंभीरता से लिया गया। बताया गया कि इसी बैठक में सार्थक सिद्धांत ने भी प्रस्तुति दी, जिसमें उन्होंने अपने ब्लॉग में किए गए दावों और OSM प्रक्रिया से जुड़ी चिंताओं को विस्तार से रखा।

केंद्र सरकार ने बनाई जांच समिति

मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने OSM सेवाओं की खरीद प्रक्रिया की जांच के लिए एक सदस्यीय समिति का गठन किया है। सरकारी आदेश के अनुसार, इस समिति की अध्यक्षता क्षमता निर्माण आयोग (Capacity Building Commission) की अध्यक्ष एस. राधा चौहान करेंगी। समिति को यह जांच करनी होगी कि OSM सेवाओं की खरीद प्रक्रिया निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप हुई थी या नहीं।

एक महीने में देनी होगी रिपोर्ट

सरकार द्वारा जारी आदेश के मुताबिक जांच समिति को अपनी रिपोर्ट एक महीने के भीतर कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (Department of Personnel & Training) को सौंपनी होगी। रिपोर्ट में खरीद प्रक्रिया, चयन मानकों और संभावित अनियमितताओं से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद सरकार आगे की कार्रवाई पर निर्णय ले सकती है।

छात्रों और अभिभावकों की नजर जांच पर

CBSE देश का सबसे बड़ा स्कूल शिक्षा बोर्ड है और इसके फैसले सीधे तौर पर लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित करते हैं। ऐसे में मूल्यांकन प्रक्रिया की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। अब छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह रिपोर्ट न केवल OSM विवाद की सच्चाई सामने ला सकती है, बल्कि भविष्य में परीक्षा मूल्यांकन प्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाने का रास्ता भी तय कर सकती है।

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