Chandrabhaga Beas Link : ब्यास से मिलेगी चंद्रभागा:अटल जी के नदी जोड़ो सपने को नई रफ्तार, चंद्रभागा-ब्यास लिंक से बदलेगा उत्तर भारत का जल और ऊर्जा भविष्य!

Bindash Bol

Chandrabhaga Beas Link : जी नहीं यह कोई चंद्रधर शर्मा गुलेरी की कहानी नहीं बल्कि युग दृष्टा अटल बिहारी वाजपेई के नदियो को जोड़ने के स्वप्न को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा जमीन पर उतारे जाने की कहानी है। सिंधु जल प्रणाली से संबंधित परियोजनाओं ने भारत ने एक और कदम बढ़ाया है, इस संदर्भ में हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति क्षेत्र में प्रस्तावित चंद्रभागा (चेनाब)–ब्यास (बिपाशा) लिंक टनल परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लगभग 2,300 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के अंतर्गत 8.7 किलोमीटर लंबी सुरंग और एक बैराज का निर्माण किया जाएगा, जिसके माध्यम से चंद्रभागा नदी के अतिरिक्त जल को ब्यास नदी बेसिन की ओर मोड़ा जाएगा। सरकार ने इसके लिए जुलाई 2029 की समय-सीमा निर्धारित की है।

चंद्रभागा नदी, जिसे जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान में चेनाब के नाम से जाना जाता है, सिंधु नदी प्रणाली की प्रमुख पश्चिमी नदियों में से एक है। सिंधु जल संधि के अंतर्गत चेनाब, झेलम और सिंधु का अधिकांश जल उपयोग पाकिस्तान को प्राप्त है, जबकि भारत को सीमित उपयोग और जलविद्युत परियोजनाओं के विकास की अनुमति है। यह सब पहलगाम आतंकी हमले ने बदल दिया अब भारत इस संधि की समीक्षा तथा इसके प्रावधानों के पुनर्मूल्यांकन कर रहा है। सो कहना न होगा चंद्रभागा–ब्यास लिंक परियोजना मात्र एक जल संसाधन परियोजना नहीं, बल्कि व्यापक रणनीतिक समझदारी है।

इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य हिमाचल प्रदेश में उपलब्ध अतिरिक्त जल का बेहतर उपयोग करना है। वर्तमान में चंद्र नदी का एक बड़ा हिस्सा बिना उपयोग के आगे बह जाता है। सुरंग के माध्यम से इस जल को ब्यास बेसिन में स्थानांतरित करने से सिंचाई, पेयजल और जलविद्युत उत्पादन की संभावनाएँ बढ़ेंगी। साथ ही, हिमाचल प्रदेश और उत्तर भारत के अन्य क्षेत्रों में जल उपलब्धता में सुधार हो सकता है। जलवायु परिवर्तन और अनिश्चित मानसून की परिस्थितियों में ऐसी परियोजनाएँ दीर्घकालिक जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

चेनाब बेसिन पहले से ही भारत के सबसे विकसित जलविद्युत क्षेत्रों में से एक है। यहाँ सलाल, बगलीहार और दुल हस्ती जैसी बड़ी परियोजनाएँ कार्यरत हैं। इन परियोजनाओं ने न केवल ऊर्जा उत्पादन में योगदान दिया है, बल्कि नदी प्रवाह के प्रबंधन की क्षमता भी विकसित की है। इसके अतिरिक्त सावलकोट, बर्सर और दुल हस्ती चरण-II जैसी नई परियोजनाएँ भी प्रस्तावित अथवा निर्माणाधीन हैं। सावलकोट परियोजना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसे चेनाब बेसिन की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में गिना जाता है।

इन परियोजनाओं के साथ-साथ यदि चंद्रभागा–ब्यास लिंक सफलतापूर्वक लागू होती है, तो चेनाब नदी के ऊपरी भाग में भारत का जल-नियंत्रण और अधिक सुदृढ़ होगा। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इससे पाकिस्तान की ओर जाने वाले जल प्रवाह पर प्रभाव पड़ सकता है, विशेषकर तब जब विभिन्न बांधों और जलाशयों का समन्वित संचालन किया जाए। हालांकि यह ध्यान रखना आवश्यक है कि किसी भी नदी के कुल प्रवाह को पूरी तरह रोकना तकनीकी, पर्यावरणीय और कानूनी दृष्टि से अत्यंत जटिल कार्य है।

इसी प्रकार, अखनूर क्षेत्र के निकट प्रस्तावित चंद्रभागा–तवी लिंक भी चर्चा का विषय है। तवी नदी जम्मू क्षेत्र की प्रमुख नदी है, जिसका जलग्रहण क्षेत्र उधमपुर और आसपास के पहाड़ी इलाकों तक फैला हुआ है। तवी बेसिन में भी कई बांध और जल प्रबंधन परियोजनाएँ प्रस्तावित हैं। जम्मू शहर में विकसित किया जा रहा तवी वाटरफ्रंट तथा प्रस्तावित बैराज इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। यदि चेनाब और तवी प्रणालियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होता है, तो जम्मू क्षेत्र की जल आवश्यकताओं को अधिक प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सकता है।

दूसरी ओर, इन परियोजनाओं को लेकर पर्यावरणीय चिंताएँ भी सामने आती हैं। हिमालयी क्षेत्र भूगर्भीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। बड़े पैमाने पर सुरंग निर्माण, बांधों का निर्माण और नदी प्रवाह में परिवर्तन स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र, वन्यजीवन और समुदायों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए परियोजना के क्रियान्वयन में पर्यावरणीय प्रभाव आकलन, वैज्ञानिक निगरानी तथा स्थानीय हितधारकों की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।

भू-राजनीतिक दृष्टि से भी यह परियोजना महत्वपूर्ण है। भारत और पाकिस्तान के संबंधों में जल हमेशा एक संवेदनशील विषय रहा है। यदि भारत अपनी पश्चिमी नदियों के जल का अधिकतम वैध उपयोग करने की दिशा में आगे बढ़ता है, तो इसका क्षेत्रीय राजनीति पर प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय जल कानूनों और द्विपक्षीय समझौतों के दायरे में रहते हुए ही किसी भी परियोजना का संचालन किया जाना चाहिए।

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