Defense Budget : दुनिया अब बारूद के ढेर पर बैठी है। लगातार 11वें साल वैश्विक सैन्य खर्च में बढ़ोत्तरी हुई है, जो अब 2,887 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि दुनिया अपनी कुल जीडीपी का 2.5% हिस्सा सिर्फ जंग की तैयारी पर खर्च कर रही है—यह 2009 के बाद का सबसे खतरनाक आंकड़ा है।
भारत: ड्रैगन और पड़ोस की चुनौतियों का जवाब
भारत ने अपनी सीमाओं को अभेद्य बनाने के लिए तिजोरी खोल दी है। रिपोर्ट के मुताबिक…
* रक्षा बजट: भारत ने 2025 में अपने सैन्य खर्च में 8.9% का बड़ा इजाफा किया।
* कुल खर्च: अब भारत का रक्षा बजट 92.1 अरब डॉलर हो चुका है।
* वजह: मई 2025 में पाकिस्तान के साथ बढ़ी सैन्य तनातनी, जिसमें ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ, ने भारत को अपनी ताकत बढ़ाने पर मजबूर किया।
ग्लोबल ‘पावर गेम’: कौन कितना ताकतवर?
दुनिया के कुल सैन्य खर्च का 58% हिस्सा केवल पांच देशों की जेब से निकल रहा है। देखिए ‘बिग फाइव’ की स्थिति….

पड़ोस का हाल: कर्ज में डूबा पाकिस्तान भी रेस में
आर्थिक बदहाली के बावजूद पाकिस्तान अपनी सैन्य सनक से पीछे नहीं हट रहा है। चीन से नए हथियार खरीदने और पुराने कर्ज चुकाने के लिए उसने अपने रक्षा बजट में 11% की वृद्धि की है, जो अब 11.9 अरब डॉलर हो गया है।
यूरोप और एशिया: युद्ध के मुहाने पर खड़ी दुनिया
* यूरोप: यूक्रेन युद्ध और नाटो की तैयारियों के चलते यहां रक्षा खर्च में 14% की रिकॉर्ड वृद्धि हुई है।
* एशिया: चीन की दादागिरी और क्षेत्रीय विवादों के कारण एशिया और ओशिआनिया में 8.1% खर्च बढ़ा है।
नतीजा साफ़ है… दुनिया शांति से ज्यादा युद्ध की तैयारी में निवेश कर रही है। अमेरिका की पकड़ कुछ ढीली हुई है, तो चीन लगातार 31 सालों से अपनी सेना को आधुनिक बनाने में जुटा है। भारत के लिए यह महज खर्च नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक व्यवस्था और पड़ोसियों की चुनौतियों के बीच अपनी संप्रभुता बचाने की मजबूरी है।