* SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग का बड़ा ऐलान, वोटर्स के लिए बदले 5 बड़े नियम
Election Commission : चुनाव आयोग में कथित विवाद और मुख्य चुनाव आयुक्त-दोनों चुनाव आयुक्तों के बीच फैसलों को लेकर कथित मतभेद को लेकर मचे विवाद के बीच दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन में ECI की बड़ी बैठक हुई। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ दोनों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी मौजूद रहे।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लगे आरोपों और एसआईआर को लेकर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने आज अपना आधिकारिक बयान जारी किया है। चुनाव आयोग ने चुनाव आयुक्तों की असहमति विवाद पर बिंदुवार स्पष्टीकरण जारी किया है। भारत निर्वाचन आयोग के महानिदेशक (मीडिया) आशीष गोयल ने बयान जारी करते हुए कहा, “आज, 26 सितंबर 2026 को दोपहर 3:00 बजे नई दिल्ली के निर्वाचन सदन में भारत निर्वाचन आयोग की बैठक हुई। आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े सभी निर्णय तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए ही लिए गए हैं।

विवादों के बीच मीटिंग..लेटर पर बयान जारी
विवादों के बीच चुनाव आयोग की हुई अहम मीटिंग में कैबिनेट सचिव को लिखी गई चिट्ठी पर जारी किए गए बयान में कहा गया कि लेटर किसी नीति से संबंधित नहीं, बल्कि डेपुटेशन पर आए एक अधिकारी से संबंधित था, कैबिनेट सचिव को लेटर नीति से संबंधित नहीं था। कैबिनेट को लिखे लेटर पर बयान जारी कहा- चिट्ठी किसी पॉलिसी से नहीं बल्कि डेपुटेशन में आए एक अफसर के कामकाज से संबंधित था।
इन विवादों के बीच आज दिल्ली में चुनाव आयोग की बैठक हुई और इस बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ दोनों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी मौजूद रहे। EC की विज्ञप्ति में SIR और आयोग के कामकाज के तरीकों से जुड़े कुछ फैसलों की भी घोषणा की गई। साथ ही, ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ (23 सितंबर) की रिपोर्ट के अनुसार, संधू और जोशी द्वारा कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखे गए पत्र पर आयोग का रुख भी स्पष्ट किया गया।
सीईसी के साथ दिखे दोनों चुनाव आयुक्त
प्रेस रिलीज़ के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने शनिवार दोपहर नई दिल्ली में निर्वाचन सदन में बैठक की। इसके साथ तीनों की एक टेबल पर बैठी हुई तस्वीर भी थी। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब एक मीडिया रिपोर्ट को लेकर विवाद चल रहा है, जिसमें कहा गया है कि संधू और जोशी ने कई मौकों पर SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर आपत्ति जताई थी।
क्या है पूरा विवाद?
एक प्रतिष्ठित अंग्रेजी अखबार की विस्फोटक रिपोर्ट ने सनसनी फैला दी थी, जिसमें दावा किया गया कि पिछले 10 महीनों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने कम से कम 14 बार ऐसे फैसलों और आदेशों पर कड़ी आपत्ति जताई थी जो उनकी पीठ पीछे या बिना सहमति के लिए गए थे।
* मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोप है कि वे तीन सदस्यीय आयोग में अकेले ही सारे कड़े फैसले ले रहे हैं।
* SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया, नाम काटने, और वोटर रजिस्ट्रेशन फॉर्म-6 में बदलावों को लेकर आयोग के अंदर ही एकराय नहीं होने की खबरें सामने आने के बाद विपक्ष CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हमलावर है।
SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग के 5 बड़े और राहत भरे ऐलान
बढ़ते दबाव के बीच 26 सितंबर को दोपहर 3 बजे हुई पूर्ण आयोग की बैठक में कुछ बड़े फैसले लिए गए ताकि जनता की नाराजगी को थामा जा सके…
* अब बीएलओ खुद घर आएंगे (No Office Visit): अनमैप्ड और लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी के मामलों में नोटिस पाने वाले मतदाताओं को अब ईआरओ/एईआरओ दफ्तर के चक्कर नहीं काटने होंगे। बूथ लेवल अधिकारी (BLO) खुद घर जाकर दस्तावेज एकत्र करेंगे और उन्हें ‘ईसीआईनेट’ पर अपलोड करेंगे।
* ऑनलाइन सुनवाई और परिवार की छूट: यदि विशेष परिस्थिति में सुनवाई की जरूरत पड़ी तो इसे पूरी तरह ऑनलाइन कराया जाएगा। मतदाता चाहें तो अपनी जगह अपने परिवार के किसी भी वयस्क सदस्य को अधिकृत कर सकते हैं।
* गरीबों और बेघर लोगों के लिए हेल्प डेस्क: जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) को रैन बसेरों, मजदूरों, गरीबों और बेघर लोगों के लिए पर्याप्त हेल्प डेस्क और विशेष शिविर लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
* महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में समयसीमा बढ़ी: दिल्ली और महाराष्ट्र के सीईओ के अनुरोध पर दावे-आपत्तियों और नोटिस के निस्तारण की अंतिम तिथि को बढ़ाकर अक्टूबर और नवंबर 2026 तक कर दिया गया है।
* पारदर्शिता और बैठकों के मिनट्स: आयोग ने अब यह तय किया है कि हर बैठक का एजेंडा पहले से जारी होगा और कार्यवाही के आधिकारिक ‘मिनट्स’ भी सार्वजनिक किए जाएंगे। साथ ही, ईसीआईनेट पोर्टल की स्वतंत्र जांच के लिए आईआईटी/आईआईआईटी विशेषज्ञों की एक समिति बना दी गई है।
