India Myanmar Relations : PM मोदी से मिलकर म्यांमार राष्ट्रपति का बड़ा ऐलान, चीन को सीधा संदेश; भारत की सुरक्षा पर दिया भरोसा

Bindash Bol

* PM Modi की बड़ी रणनीतिक जीत! China को मिला करारा जवाब

India Myanmar Relations : भारत और म्यांमार के रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग की नई दिल्ली में हुई अहम बैठक में ऐसा आश्वासन सामने आया है, जो न सिर्फ भारत की सुरक्षा को मजबूती देगा बल्कि चीन के लिए भी एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है।
हैदराबाद हाउस में हुई द्विपक्षीय वार्ता के दौरान म्यांमार के राष्ट्रपति ने साफ शब्दों में कहा कि उनकी धरती का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि म्यांमार अपनी जमीन को किसी भी ऐसे संगठन या ताकत का ठिकाना नहीं बनने देगा, जो भारत की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करे।

भारत की चिंता पर म्यांमार का बड़ा भरोसा

बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-म्यांमार सीमा के पास सक्रिय भारतीय उग्रवादी संगठनों का मुद्दा उठाया। इस पर राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग ने भारत की चिंताओं को गंभीरता से लेने और आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। दोनों नेताओं ने सीमा सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग और रक्षा साझेदारी को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई।

चीन को क्यों होगी बेचैनी?

विशेषज्ञों के अनुसार म्यांमार का यह बयान केवल भारत के प्रति मित्रता का संकेत नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय भू-राजनीति में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चीन लंबे समय से म्यांमार में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश करता रहा है। ऐसे में म्यांमार द्वारा भारत के सुरक्षा हितों के प्रति खुलकर समर्थन जताना बीजिंग के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है।

1600 KM सीमा पर बढ़ेगी निगरानी

भारत और म्यांमार के बीच लगभग 1600 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम से जुड़ी हुई है। वर्षों से कई उग्रवादी संगठन म्यांमार के सीमावर्ती क्षेत्रों का इस्तेमाल सुरक्षित ठिकानों के रूप में करते रहे हैं। दोनों देशों के बीच बढ़ता सुरक्षा सहयोग अब इन गतिविधियों पर लगाम लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

व्यापार, कनेक्टिविटी और रक्षा सहयोग पर भी बनी सहमति

वार्ता के दौरान व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, सीमा प्रबंधन, क्षमता निर्माण और विकास साझेदारी जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। कलादान मल्टी-मोडल परियोजना समेत कई रणनीतिक परियोजनाओं को गति देने पर सहमति बनी।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत अपनी ‘नेबरहुड फर्स्ट’, ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘महासागर’ नीति के तहत म्यांमार के साथ हर संभव सहयोग जारी रखेगा। वहीं म्यांमार ने भी भारत के साथ अपने संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत दौरे पर पहली बार आए राष्ट्रपति

यह म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग की पहली आधिकारिक भारत यात्रा है। उनके साथ मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और व्यापारिक प्रतिनिधियों का उच्चस्तरीय दल भी आया है। नई दिल्ली के अलावा वे मुंबई में भी विभिन्न कार्यक्रमों और व्यापारिक बैठकों में हिस्सा लेंगे।
भारत-म्यांमार की इस बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को पूर्वोत्तर की सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और चीन के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

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