* स्वर की वह सरिता, जो अब स्मृतियों में बहेगी…
Suman Kalyanpur : आशा भोसले के निधन के कुछ ही हफ्तों बाद भारतीय संगीत जगत को एक और बड़ा झटका लगा है। हमारी स्मृतियों में बसा एक और पृष्ठ आज जीवन की पुस्तक से अलग हो गया। सुमन कल्याणपुर का जाना टीस दे गया। साथ एक सन्देशा भी… जीवन अमर नहीं। छोड़ते चलो। बटोरने से बाज आओ।
दिग्गज सिंगर सुमन कल्याणपुर, जिनकी मधुर आवाज ने कई पीढ़ियों के लोगों को मंत्रमुग्ध किया, उनका रविवार, 31 मई को 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। सिनेमा में उनकी यात्रा ‘शुक्रची चांदनी’ और ‘मंगू’ (1954) जैसी फिल्मों से शुरू हुई थी।
वर्षों से उन्होंने ‘शराबी शराबी ये सावन का मौसम’, ‘आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे’, ‘ना ना करते प्यार’, ‘ना तुम हमें जानो’, ‘परबतों के पेड़ों पर’ और ‘निम्बोनीच्या झाड़ा मागे’ जैसे कई सदाबहार गानों को अपनी आवाज दी। मोहम्मद रफी के साथ उनके सहयोग को काफी लोकप्रियता मिली। उनके निधन की खबर के बाद श्रद्धांजलि का तांता लग गया, जिनमें वरिष्ठ एनसीपी नेता शरद पवार और सिंगर फैयाज सबसे पहले शोक व्यक्त करने वालों में शामिल थे।
सुमन कल्याणपुर की लता मंगेशकर से मिलती थी आवाज
सुमन की आवाज सुरीली सिंगर लता मंगेशकर से इतनी मिलती-जुलती थी कि लोग अक्सर दोनों की आवाज को लेकर भ्रमित हो जाते थे। उन्होंने संगीत की दुनिया में दशकों तक अपनी एक अलग पहचान बनाई। 28 जनवरी, 1937 को अविभाजित भारत के ढाका में जन्मीं सुमन कल्याणपुर हिंदी और मराठी सिनेमा की सबसे प्रसिद्ध सिंगर्स में से एक बनीं। फिल्मी संगीत के अलावा, उनके भजन, गजल, मराठी अभंग और भावगीत भी गाए, जो एक कलाकार के रूप में उनकी पहचान बनी।
उनके कुछ अमर और सदाबहार गीत…
• न तुम हमें जानो, न हम तुम्हें जानें
• तुमने पुकारा और हम चले आए
• आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़ुबान पर
• ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे
• दिल एक मंदिर है
• मेरे महबूब न जा
• अजब है दास्ताँ तेरी ऐ ज़िंदगी
• ठहरिए होश में आ लूँ
• बहना ने भाई की कलाई पर प्यार बाँधा है
• ये समा, समा है ये प्यार का
• चाँद फिर निकला मगर तुम न आए
• दिल ग़म से जल रहा है
• मुझे ये फूल न दे
• आज हूँ मैं अपने घर में
सुमन कल्याणपुर की पढ़ाई, शादी और बच्चे
मुंबई के सेंट कोलंबस स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद, सुमन ने चित्रकला की पढ़ाई की और सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट में दाखिला लिया। हालांकि, जल्द ही संगीत ही उनका जुनून बन गया। उन्होंने पंडित केशवराव भोले, उस्ताद खान अब्दुल रहमान खान और उस्ताद नवरंग जैसे प्रख्यात गुरुओं से ट्रेनिंग ली, जिसने उनके करियर की नींव रखी। सुमन ने 1958 में बिजनेसमैन रामानंद कल्याणपुर से शादी की। उनके परिवार में उनकी बेटी चारू अग्नि हैं।