Iran US Talks : ईरान का यू-टर्न! पाकिस्तान वार्ता से पीछे हटने के पीछे क्या है असली वजह?

Bindash Bol

Iran US Talks : पाकिस्तान में होने वाली दूसरे दौर की बातचीत से ईरान पीछे हट गया है। वह इस्लामाबाद डेलिगेशन नहीं भेजेगा। ऐसे में सवाल उठ रहा, जो ईरान कल तक बातचीत के लिए तैयार था,  वह अचानक पीछे क्यों हट गया है? आइए जानते हैं आखिर चल क्या रहा है…

डोनाल्ड ट्रंप की पोस्ट से भड़का ईरान?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर सीधे शब्दों में चेतावनी दी कि अगर ईरान डील नहीं मानता, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट (बिजली घर) और पुलों को तबाह कर देगा। उन्होंने ईरान को ‘किलिंग मशीन’ तक कह डाला। बस यहीं से बात बिगड़ गई। ईरान ने ट्रंप के इस रवैये को बचकाना बताया और पाकिस्तान में होने वाली बातचीत में आने से साफ मना कर दिया।

ईरान-अमेरिका की बातचीत क्यों टूटी?

ईरान ने इस बातचीत के फेल होने का सारा ठीकरा अमेरिका के सिर फोड़ा है। ईरान का कहना है कि अमेरिका की शर्तें अजीब हैं। उसने ऐसी मांगें रख रहा है जिन्हें पूरा करना नामुमकिन है। अमेरिका बार-बार अपनी बातों से पलट रहा है। ईरान के उप-राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका का बातचीत का तरीका बहुत ही बचकाना है। अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी कर रखी है, जिससे वहां सामान नहीं पहुंच पा रहा। जब तक ऐसा रहेगा, बातचीत होने की गुंजाइश नहीं है।

पाकिस्तान जाएगा अमेरिकी डेलिगेशन

अमेरिकी डेलिगेशन आज, सोमवार को बातचीत के लिए पाकिस्तान पहुंचने वाला है। ट्रंप ने न्यूयॉर्क पोस्ट से बातचीत में बताया था कि उनके विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर इस बातचीत में शामिल होंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस बार उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस बातचीत में शामिल नहीं होंगे। बता दें कि इससे पहले जेडी वेंस ने ही ईरान से बातचीत में अमेरिकी डेलिगेशन को लीड किया था।

हॉर्मुज में भी मचा है बवाल

जंग सिर्फ बातों तक सीमित नहीं है। समुद्र में भी हालात बहुत खराब हैं। ईरान ने हॉर्मुज जलमार्ग (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया है। ये वही रास्ता है, जहां से दुनिया का 20% तेल गुजरता है। शनिवार को ईरानी गनबोट्स ने दो भारतीय जहाजों पर भी फायरिंग की और उन्हें वापस लौटने पर मजबूर कर दिया। जिसके बाद भारत का कड़ा रूख भी देखने को मिला।

22 अप्रैल की डेडलाइन पर भी नजर

दोनों देशों के बीच चल रही अस्थाई सीजफायर (Ceasefire) 22 अप्रैल को खत्म हो रही है। शांति की उम्मीदें अब लगभग खत्म नजर आ रही हैं क्योंकि, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और उनकी टीम बातचीत के लिए पाकिस्तान जाने वाली थी, लेकिन अब शायद ही कोई मीटिंग हो। पाकिस्तान ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे, जो अब धरे के धरे रह गए हैं। बड़ी बात ये है कि अगर 22 अप्रैल तक कोई समाधान नहीं निकला, तो खाड़ी देशों में युद्ध की आग और भड़क सकती है।

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