Jharkhand High Court : लापता बच्ची मामले में झारखंड हाईकोर्ट सख्त

Bindash Bol

* 8 साल बाद भी सुराग नहीं, CBI जांच की चेतावनी

* न्याय में देरी पर अदालत का कड़ा रुख

Jharkhand High Court :झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के गुमला जिले से वर्ष 2018 में लापता हुई बच्ची के मामले में पुलिस जांच की धीमी प्रगति पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को दो सप्ताह का समय दिया है। सोमवार को इस मामले में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने चेतावनी दी कि यदि इस अवधि में अनुसंधान का कोई सार्थक परिणाम सामने नहीं आता है, तो मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपा जा सकता है।

डीजीपी वर्चुअल माध्यम से उपस्थित हुईं

न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान झारखंड की पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्र वर्चुअल माध्यम से उपस्थित हुईं और जांच की वर्तमान स्थिति की जानकारी दी। अदालत ने डीजीपी से पूछा कि सात वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद बच्ची का अब तक कोई पता क्यों नहीं चल सका और पुलिस की जांच किस दिशा में आगे बढ़ रही है।

गुमला एसपी से भी मांगी रिपोर्ट

सुनवाई के दौरान अदालत ने गुमला के पुलिस अधीक्षक से भी मामले की प्रगति के बारे में जानकारी ली। प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर अदालत ने पाया कि जांच में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है, जिस पर असंतोष व्यक्त करते हुए राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत और संतोषजनक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया।

लापता बच्ची की मां ने दायर की है हैबियस कॉर्पस याचिका

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अगली सुनवाई तक जांच में ठोस परिणाम सामने नहीं आते हैं, तो मामले की जांच सीबीआई को हस्तांतरित करने पर विचार किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इस मामले में लापता बच्ची की मां ने हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की है।

पूर्व की सुनवाई में हाईकोर्ट ने न केवल जांच की प्रगति पर सवाल उठाए थे, बल्कि लापता बच्चों की तलाश में तकनीक के प्रभावी उपयोग और आधार से संबंधित डाटा के इस्तेमाल के लिए स्पष्ट मानक कार्यप्रणाली (एसओपी) तैयार करने की आवश्यकता भी रेखांकित की थी। मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था, जिसने विभिन्न स्थानों पर जाकर पड़ताल भी की, लेकिन अब तक बच्ची का कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका है। हाईकोर्ट ने पहले भी इस तरह के मामलों को गंभीरता से लेने और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

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