* बोकारो-रांची के दो केंद्रों पर पेपर गड़बड़ी के बाद परीक्षा रद्द
JET Exam Scam : झारखंड में एक बार फिर वही पुरानी कहानी दोहराई गई—परीक्षा की तैयारी, छात्रों की उम्मीदें और अंत में सरकारी तंत्र की चरमराती व्यवस्था। 26 अप्रैल को आयोजित झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JET) केवल एक परीक्षा नहीं थी, बल्कि हजारों युवाओं के सपनों की उड़ान थी, जिसे ‘लापरवाही’ के पहिए के नीचे बेरहमी से कुचल दिया गया।
बोकारो और रांची के परीक्षा केंद्रों पर जो हुआ, उसने न केवल राज्य की शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या झारखंड में कोई भी बड़ी परीक्षा बिना धांधली या अव्यवस्था के संपन्न हो सकती है?

तमाशा-ए-इंतजाम: न पेपर पूरे, न नीयत साफ!
बोकारो के सेक्टर-9 स्थित सरदार पटेल पब्लिक स्कूल में जो हुआ, वह प्रशासनिक बेशर्मी की पराकाष्ठा है। परीक्षार्थी सुबह 8 बजे से अपनी किस्मत आजमाने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें क्या मिला?
* अधूरे पैकेट और गायब प्रश्न पत्र: जब पैकेट खुले, तो सवाल कम पड़ गए।
* घंटों का मानसिक उत्पीड़न: दोपहर 12:30 बजे तक छात्रों को आश्वासन की घुट्टी पिलाई गई और अंत में उन्हें धक्के मारकर बाहर निकाल दिया गया।
सवाल: क्या अधिकारियों को यह नहीं पता था कि कितने छात्र परीक्षा दे रहे हैं? क्या प्रश्न पत्र गिनने की जिम्मेदारी किसी की नहीं थी? या फिर यह जानबूझकर किया गया कोई ‘सुनियोजित खेल’ था?
प्रिंटिंग का ‘काला खेल’ और उड़िया विषय की बलि
रांची के एएसटीवीएस डिस्ट्रिक्ट सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में तो आलम और भी बदतर था। यहाँ उड़िया विषय के प्रश्न पत्र इस कदर ‘धुंधले’ थे कि उन्हें पढ़ना नामुमकिन था।
* तकनीकी त्रुटि या जानबूझकर की गई गलती? जब लाखों का बजट परीक्षा आयोजन पर खर्च होता है, तो क्या एक पठनीय प्रश्न पत्र छापना भी आयोग की हैसियत से बाहर है?
* छात्रों का आक्रोश: जब पेपर पढ़ा ही नहीं जा सकता, तो जवाब क्या मिट्टी में दिए जाते? प्रशासन ने गलती सुधारने के बजाय सीधे परीक्षा रद्द कर अपनी खाल बचाने की कोशिश की।
अधिकारियों की कारस्तानी: कौन लेगा जिम्मेदारी?
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने रटा-रटाया बयान जारी कर दिया है कि “नई तिथि घोषित की जाएगी।” लेकिन उन हजारों अभ्यर्थियों के समय, पैसे और मानसिक पीड़ा का हिसाब कौन देगा, जो तपती धूप में दूर-दराज के गांवों से किराया खर्च कर केंद्र पहुंचे थे?
सत्ता के गलियारों से उठते चुभते सवाल…
* 1.क्या इन ‘लापरवाह अधिकारियों’ के खिलाफ महज जांच होगी या उन्हें ऐसी सजा मिलेगी जो नजीर बने?
* 2.छात्रों के भविष्य के साथ बार-बार हो रहे इस खिलवाड़ का अंत कब होगा?
* 3.क्या JPSC का पूरा ढांचा ही भ्रष्टाचार और अक्षमता की भेंट चढ़ चुका है?
आक्रोश की आग में सुलगता छात्र वर्ग
परीक्षा केंद्रों के बाहर हुआ हंगामा सिर्फ छात्रों की नाराजगी नहीं, बल्कि उनके सब्र का बांध टूटना है। जब-जब सिस्टम फेल होता है, गाज हमेशा गरीब और मध्यमवर्गीय छात्र पर गिरती है। यह घटना साबित करती है कि झारखंड में शिक्षा माफिया और लापरवाह अधिकारियों का गठबंधन युवाओं के भविष्य को दीमक की तरह चाट रहा है।
अब देखना यह है कि जांच की फाइलें धूल फांकेंगी या वाकई किसी पर गाज गिरेगी। तब तक के लिए, झारखंड का युवा फिर से एक नई तारीख के इंतजार में कतार में खड़ा है।