Jharkhand : क्या अब सरकारी अधिकारी भी सुरक्षित नहीं हैं? क्या जमीन के विवाद का फैसला अदालत और कानून नहीं, बल्कि लाठी-डंडे और पत्थर करेंगे? झारखंड के रामगढ़ जिले से सामने आई यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
गिरिडीह जिला अवर निबंधन कार्यालय में पदस्थापित सब-रजिस्ट्रार बालेश्वर पटेल की कथित तौर पर जमीन विवाद में बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। बताया जा रहा है कि वे अपनी खरीदी हुई 11 डिसमिल जमीन पर लगाए गए सबमर्सिबल पंप को देखने पहुंचे थे। तभी आरोपियों ने लाठी, डंडों और पत्थरों से उन पर हमला कर दिया। सिर और चेहरे पर लगातार वार किए गए और गंभीर रूप से घायल अधिकारी ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
कानून का राज या दबंगों का आतंक?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि एक सरकारी अधिकारी खुलेआम भीड़ के हमले का शिकार हो सकता है, तो आम नागरिक की सुरक्षा की क्या गारंटी है? प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हमलावर इतने आक्रामक थे कि लोग चाहकर भी बीच-बचाव नहीं कर सके। क्या अपराधियों में कानून का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है?
पत्नी ने लगाए गंभीर आरोप
मृतक की पत्नी रीता कुमारी ने कई नामजद आरोपियों के खिलाफ हत्या की साजिश और जानलेवा हमले का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि आरोपियों ने न सिर्फ उनके पति की जान ली, बल्कि उनके बच्चों का भविष्य भी छीन लिया। उन्होंने सभी दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और कठोर सजा की मांग की है।
वीडियो आया सामने, जांच जारी
बताया जा रहा है कि घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कुछ लोग लाठी-डंडों और पत्थरों से हमला करते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस ने छह लोगों को हिरासत में लिया है और फोरेंसिक जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल से मिले साक्ष्यों को भी जांच के लिए भेजा गया है।
सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, उदाहरण बने सजा
मांडू विधायक सहित कई जनप्रतिनिधियों ने घटना की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। लेकिन सवाल यह है कि क्या हर बार हत्या के बाद सिर्फ जांच और गिरफ्तारी की घोषणा ही होगी, या अपराधियों को ऐसी सजा मिलेगी जो भविष्य में किसी को कानून हाथ में लेने से पहले सौ बार सोचने पर मजबूर कर दे?
व्यवस्था के लिए चेतावनी
जमीन विवाद अब सिर्फ दीवानी मामला नहीं रह गया है, बल्कि कई जगह खूनी संघर्ष का कारण बन चुका है। यदि प्रशासन समय रहते विवादों का समाधान नहीं करेगा और अपराधियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तो ऐसी घटनाएं समाज में कानून के प्रति भरोसे को कमजोर करती रहेंगी।