मानसून सत्र का ‘रणनीतिक दंगल’: क्या सरकार को घेरेगा विपक्ष, या फिर से ठप होगी संसद?

Bindash Bol

सरकार की रणनीति बनाम विपक्ष की घेराबंदी, संसद चलेगी या फिर होगा हंगामा?

Monsoon Session :संसद के मानसून सत्र का बिगुल बज चुका है। सत्र शुरू होने में महज चार दिन शेष हैं और दिल्ली की सियासत में ‘मीटिंग पॉलिटिक्स’ का पारा अपने चरम पर है। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ही अपने-अपने तरकश में तीर सजाने में जुटे हैं।

सत्ता पक्ष का एजेंडा: क्या है सरकार की तैयारी?

​प्रधानमंत्री आवास पर हुई हाई-लेवल मीटिंग में पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने मंथन किया। सरकार ने सत्र का एजेंडा भी जारी कर दिया है….

* ​विधायी कार्य: इस सत्र में सरकार 5 नए बिल और 2 लंबित बिल पेश करने की योजना बना रही है।

* ​सर्वदलीय बैठक: रविवार को होने वाली सर्वदलीय बैठक में सरकार बिलों पर चर्चा कर सभी दलों को विश्वास में लेने की कोशिश करेगी।

* ​संविधान संशोधन: फिलहाल, प्रस्तावित बिलों की सूची में किसी भी संविधान संशोधन का जिक्र नहीं है, हालांकि एजेंडा में बदलाव संभव है।

विपक्ष की ‘अटैक लिस्ट’: सरकार को घेरने की तैयारी

​कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने सरकार को संसद में ‘बेचैन’ करने के लिए एक लंबी लिस्ट तैयार की है। सोनिया गांधी के आवास पर हुई रणनीति बैठक में प्रमुख मुद्दे तय किए गए…

* ​परिसीमन बिल (Delimitation Bill): यह सबसे बड़ा मुद्दा है। कांग्रेस ने मांग की है कि बिल पेश करने से पहले सर्वदलीय बैठक हो और उन्हें बिल के अध्ययन के लिए पर्याप्त समय मिले।

विवादों के घेरे में सरकार, विपक्ष इन मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगेगा…

* ​राम मंदिर: चढ़ावा चोरी का विवाद।

* ​अर्थव्यवस्था: महंगाई और एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल का मुद्दा।

* ​भ्रष्टाचार और पेपर लीक: शिक्षा व्यवस्था में अनियमितताएं और सरकारी तंत्र की विफलता।

* ​राजनीतिक वर्चस्व: विपक्षी दलों को तोड़ने का आरोप।

सबसे बड़ी पहेली: परिसीमन और विपक्ष की ‘अंदरूनी दरार’

​दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस जहां परिसीमन बिल का पुरजोर विरोध कर रही है, वहीं उसके सहयोगी दलों के रुख ने स्थिति को पेचीदा बना दिया है….

* ​सुप्रिया सुले (NCP-शरद गुट): उन्होंने संकेत दिए हैं कि अगर बिल 50% सीट बढ़ोतरी पर आधारित हो, तो समर्थन पर विचार किया जा सकता है।

* ​संजय राउत (शिवसेना-UBT): उनका कहना है कि अगर विपक्ष के सुझाव शामिल किए जाएं, तो पार्टी अपना रुख बदल सकती है।

​कांग्रेस के लिए चुनौती सिर्फ सरकार से लड़ना नहीं, बल्कि अपने गठबंधन को एकजुट रखना भी है। दूसरी ओर, जयराम रमेश ने तीखे तेवर दिखाते हुए इसे ‘कलंकित बहुमत’ की कोशिश करार दिया है, जबकि बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस फिर से संसद की कार्यवाही ठप करना चाहती है।

मानसून सत्र महज एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सियासी अखाड़ा बनने वाला है। एक तरफ सरकार अपने बिलों को पास कराने की ‘चाल’ चल रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष ‘घेराबंदी’ की तैयारी में है। देखना यह होगा कि क्या इस बार संसद सार्थक चर्चा के लिए चलेगी, या हंगामे की भेंट चढ़ जाएगी?

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