Pakistan: पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर आलोचनाओं के केंद्र में है। यूरोपीय संघ (EU) की नई GSP+ मूल्यांकन रिपोर्ट में देश की मानवाधिकार स्थिति, कानून के शासन और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में स्पष्ट संकेत दिया गया है कि यदि पाकिस्तान ने समय रहते ठोस सुधार नहीं किए, तो उसे मिलने वाली महत्वपूर्ण व्यापारिक रियायतें वापस ली जा सकती हैं। ऐसे समय में यह चेतावनी पाकिस्तान के लिए बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था पहले से ही दबाव में है और यूरोपीय बाजार में मिलने वाली यह सुविधा उसके निर्यात का बड़ा आधार है।
क्या है GSP+ और पाकिस्तान के लिए क्यों है अहम?
GSP+ (Generalized Scheme of Preferences Plus) यूरोपीय संघ की एक विशेष व्यापारिक योजना है, जिसके तहत चुनिंदा विकासशील देशों को यूरोपीय बाजार में कम या शून्य आयात शुल्क पर सामान बेचने की सुविधा मिलती है। पाकिस्तान को यह दर्जा वर्ष 2014 में मिला था, जिससे उसके टेक्सटाइल और चमड़ा उद्योग को बड़ा लाभ हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, केवल 2024 में ही इस योजना के कारण पाकिस्तान को लगभग 732 मिलियन यूरो (73.2 करोड़ यूरो) की शुल्क राहत मिली।
रिपोर्ट में किन मुद्दों पर उठे सवाल?
यूरोपीय संघ ने कहा है कि व्यापारिक रियायतों के साथ मानवाधिकार, लोकतंत्र और कानून के शासन का सम्मान भी अनिवार्य है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि पाकिस्तान इन क्षेत्रों में अपेक्षित प्रगति नहीं कर पाया है।
रिपोर्ट में विशेष रूप से बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में कथित जबरन गुमशुदगी, सुरक्षा बलों की कार्रवाई, पत्रकारों की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी और असहमति रखने वालों के खिलाफ कार्रवाई पर चिंता व्यक्त की गई है। इसके अलावा ईशनिंदा कानून और कुछ साइबर कानूनों के कथित दुरुपयोग को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
महिलाओं, अल्पसंख्यकों और बच्चों के अधिकारों पर भी चिंता
EU की रिपोर्ट में महिलाओं, धार्मिक अल्पसंख्यकों और बच्चों के अधिकारों की स्थिति पर भी गंभीर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान को सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही बाल मजदूरी खत्म करने, न्यायपालिका की स्वतंत्रता मजबूत करने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता बताई गई है।
2027 तक सुधार नहीं हुए तो छिन सकती है व्यापारिक रियायत
यूरोपीय संघ ने संकेत दिया है कि पाकिस्तान के पास सुधार के लिए सीमित समय है। यदि 2027 तक मानवाधिकार, कानून व्यवस्था और लोकतांत्रिक सुधारों में ठोस प्रगति नहीं दिखती, तो GSP+ के तहत मिलने वाली व्यापारिक सुविधाएं वापस ली जा सकती हैं। ऐसा होने पर पाकिस्तान से यूरोप जाने वाले उत्पादों पर दोबारा आयात शुल्क लग सकता है, जिससे उसकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित होगी।
अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है बड़ा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाकिस्तान GSP+ का दर्जा खो देता है, तो सबसे अधिक असर उसके टेक्सटाइल और चमड़ा उद्योग पर पड़ेगा। यूरोप पाकिस्तान के सबसे बड़े निर्यात बाजारों में शामिल है। व्यापारिक रियायतें खत्म होने की स्थिति में पाकिस्तानी उत्पाद महंगे हो जाएंगे, जिससे उनकी मांग घट सकती है। इसका असर उद्योग, रोजगार और विदेशी मुद्रा आय पर भी पड़ सकता है।
आने वाले वर्षों में पाकिस्तान के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुधार लागू कर अपने व्यापारिक हितों को सुरक्षित रख सके।