PM-CM Disqualification Bill: 30 दिन जेल में रहते ही कुर्सी जाएगी, मानसून सत्र में फिर से पेश होगा 130वां संविधान संशोधन विधेयक

Siddarth Saurabh

PM-CM Disqualification Bill: केंद्र सरकार संसद के आगामी मानसून सत्र में एक ऐतिहासिक और चर्चित विधेयक को दोबारा पेश करने की तैयारी कर रही है। यह विधेयक प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्रीय और राज्य मंत्रियों के लिए नया अनुशासनात्मक मानदंड तय करेगा। अगर कोई गंभीर अपराध (5 वर्ष या अधिक की सजा वाला) में 30 दिन तक न्यायिक हिरासत में रहता है, तो वह स्वतः पद से हट जाएगा।

विधेयक का मर्म

130वें संविधान संशोधन विधेयक, 2025 के प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई पीएम, सीएम या मंत्री किसी ऐसे मामले में 30 दिनों तक लगातार हिरासत में रहता है जिसमें न्यूनतम 5 वर्ष की सजा का प्रावधान है, तो उसकी कुर्सी अपने आप (automatically) चली जाएगी। यह निष्कासन राष्ट्रपति या राज्यपाल के आदेश पर भी हो सकता है, लेकिन 31वें दिन यह प्रक्रिया स्वतः प्रभावी हो जाएगी।
यह व्यवस्था राजनीतिक पदों पर बैठे व्यक्तियों में जवाबदेही और नैतिकता को मजबूत करने का प्रयास मानी जा रही है। गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले मानसून सत्र में इससे संबंधित तीन विधेयकों को संसद के दोनों सदनों में पेश किया था, जिसके बाद इन्हें संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेज दिया गया।

JPC रिपोर्ट और समयरेखा

ओडिशा से भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता वाली JPC इस विधेयक की जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार, समिति 17 जुलाई को अपनी रिपोर्ट को मंजूरी दे सकती है। इसके तुरंत बाद 20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र में सरकार इस बिल को कैबिनेट की मंजूरी के बाद संसद में चर्चा के लिए पेश कर सकती है।

विपक्ष का विरोध

कांग्रेस सहित INDIA गठबंधन के अधिकांश सदस्यों ने JPC की कार्यवाही का बहिष्कार किया। उनका मुख्य तर्क है कि यह विधेयक “निरपराध presumption of innocence” के मूल सिद्धांत का उल्लंघन करता है। विपक्ष का कहना है कि केवल हिरासत के आधार पर किसी जनप्रतिनिधि को दंडित करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है। उन्होंने JPC को “रबर स्टैंप” की संज्ञा देते हुए आरोप लगाया कि सत्ताधारी पक्ष विपक्ष की चिंताओं को नजरअंदाज कर बिल पास कराने के लिए समिति का इस्तेमाल कर रहा है।

संसद में नंबर गेम

संविधान संशोधन बिल को पास करने के लिए लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत (362 वोट) और राज्यसभा में भी दो-तिहाई की जरूरत है।
लोकसभा: NDA की ताकत बढ़कर 330 हो गई है, लेकिन अभी भी 32 वोट कम हैं।
राज्यसभा: NDA की संख्या 141 + 10 नॉमिनेटेड/निर्दलीय = 151 हो गई है। साधारण बहुमत के लिए पर्याप्त, लेकिन संविधान संशोधन के लिए अभी भी 11 वोट की कमी है।
हाल ही में TMC के 20 सांसदों के NCPI में विलय और अन्य घटनाओं से NDA की स्थिति मजबूत हुई है, लेकिन दो-तिहाई बहुमत अभी चुनौती बरकरार है।

यह विधेयक यदि कानून बन गया तो भारतीय राजनीति में एक नया अध्याय शुरू करेगा। यह उन नेताओं के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है जो लंबे समय से गंभीर आपराधिक मामलों में फंसे हुए हैं। सरकार इसे “राजनीतिक शुद्धिकरण” का कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे “राजनीतिक प्रतिशोध का हथियार” करार दे रहा है।
मानसून सत्र इस बार विधायी रूप से बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है, जिसमें यह बिल सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहेगा।

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