Sonia Gandhi Book Controversy : कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित आत्मकथा ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ को लेकर देश के सियासी और साहित्यिक गलियारों में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मशहूर पब्लिशिंग हाउस पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने किताब को भारत में प्रकाशित करने से साफ इनकार कर दिया है। इसके बाद सोनिया गांधी और कांग्रेस ने केंद्र सरकार के दबाव का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है, वहीं पब्लिशर ने इसे संपादकीय असहमति का मामला बताया है।
सोनिया गांधी का कड़ा प्रहार…’सरकार विरोधी लेखकों का गला घोंट रहा पब्लिशर’
किताब के पब्लिकेशन पर रोक लगने के बाद सोनिया गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने पब्लिशर पर सीधा निशाना साधते हुए एक पोस्टर साझा किया, जिस पर लिखा था— ‘पेंगुइन है या पिंजरे का परिंदा?’
सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि पेंगुइन इंडिया लगातार उन लेखकों को निराश कर रहा है जिनका काम केंद्र सरकार को रास नहीं आता। उन्होंने कहा कि कई ऐसे मामले जनता के सामने हैं, जबकि कई अनगिनत मामलों को पर्दे के पीछे ही दबा दिया गया।
पेंगुइन की सफाई…. ‘एडिटोरियल बदलाव न मानना बना वजह’
विवाद गहराने पर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की। पब्लिशिंग हाउस के मुताबिक…
* पेंगुइन भारत में इस किताब का प्रकाशक नहीं रहेगा क्योंकि लेखक (सोनिया गांधी) ने सुझाए गए एडिटोरियल बदलावों को स्वीकार करने से मना कर दिया।
* पब्लिशर के तौर पर तथ्यों की निष्पक्ष जांच करना और किताब के हित में जरूरी बदलाव सुझाना उनकी मानक प्रक्रिया और अधिकार का हिस्सा है।
* हाउस शुरुआत में इस किताब को छापने का इच्छुक था, लेकिन लेखक की असहमति के बाद पीछे हटने का फैसला लिया गया। इसके साथ ही पब्लिशर ने लेखक के साथ हुई बातचीत को गोपनीय बताते हुए आगे कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
राहुल गांधी का भावुक संदेश
किताब के ऐलान के वक्त लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपनी मां के संघर्षों को याद करते हुए एक भावुक पोस्ट लिखी थी। राहुल ने लिखा था….
”मम्मा, मैंने आपको और पापा (राजीव गांधी) को आखिरी बार 35 साल पहले एक साथ देखा था। पापा के जाने के बाद आपने जिस हिम्मत और गरिमा के साथ जिंदगी की हर मुश्किल का सामना किया, वह केवल मैं और प्रियंका ही जानते हैं। मुझे गर्व है कि आपकी यह अनकही कहानी—’बिलॉन्गिंग’—आखिरकार वे लोग पढ़ेंगे जो आपसे प्यार करते हैं।”
पहले भी विवादों में घिर चुका है पेंगुइन इंडिया
पेंगुइन इंडिया पर सरकारी दबाव में किताबें रोकने का यह पहला आरोप नहीं है। इससे पहले पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की संस्मरण पुस्तक ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर भी भारी विवाद हुआ था। उस किताब में गलवान घाटी में भारत-चीन सैन्य झड़प और ‘अग्निपथ योजना’ को लेकर किए गए खुलासों के चलते प्रकाशन को कथित तौर पर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था, जिसे बाद में राहुल गांधी ने संसद में भी उठाया था।
