Students Protest : झारखंड की फिज़ाओं में इन दिनों हक और इंसाफ की लड़ाई तैर रही है। जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) भर्ती परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ आंदोलित छात्रों का कारवां जब राजधानी के ऐतिहासिक ‘जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम’ में डटा, तो उन्हें एक ऐसा संबल मिला जिसने पूरे आंदोलन में नई जान फूंक दी। हॉकी के जादूगर और आदिवासियों के नायक ‘मारंग गोमके’ जयपाल सिंह मुंडा के बेटे जयंत जयपाल सिंह खुद चलकर युवाओं के बीच पहुंचे और उनकी लड़ाई को अपना खुलकर समर्थन दिया।
“यह मैदान छात्रों के श्रमदान का पसीना है, हक मांगना उनका अधिकार”
जयंत जयपाल सिंह ने इस मौके पर स्टेडियम से जुड़े एक भावुक और ऐतिहासिक किस्से से पर्दा उठाया। उन्होंने बताया कि जिस जमीन पर आज यह स्टेडियम खड़ा है, वहां कभी एक बड़ा तालाब हुआ करता था। स्कूल के बच्चों ने अपने श्रमदान और पसीने से सींचकर इसे खेल के मैदान की शक्ल दी थी।
”यह मैदान केवल मारंग गोमके का नहीं, बल्कि इन छात्रों और युवाओं की अमानत है। युवा इसका उपयोग अपनी जायज मांगों को उठाने के लिए कर रहे हैं, जो एक रचनात्मक कदम है।
भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद से मुक्त नए झारखंड के निर्माण के लिए लड़ रहे इन छात्रों के साथ मैं मजबूती से खड़ा हूं।”
— जयंत जयपाल सिंह
आंदोलनकारियों को सतर्कता का मंत्र: “उपद्रवियों से रहें दूर”
छात्रों की जायज मांग को सही ठहराते हुए जयंत जयपाल सिंह ने आंदोलनकारियों को एक अभिभावक की तरह नसीहत भी दी। उन्होंने अभ्यर्थियों से अपील की कि वे अपने शांतिपूर्ण आंदोलन में उपद्रवियों और बाहरी तत्वों को जगह न दें। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल आज की नहीं, बल्कि आने वाले 4-5 सालों में पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षाएं सुनिश्चित कराने का संकल्प है, ताकि हर योग्य छात्र को उसका हक मिल सके।
एक नज़र: कौन थे ‘मारंग गोमके’ जयपाल सिंह मुंडा?
* हॉकी के नायक: 1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाने वाली भारतीय हॉकी टीम के कप्तान।
* जननायक: 20वीं सदी के सबसे कद्दावर आदिवासी नेताओं में शुमार, जिन्हें प्यार से ‘मारंग गोमके’ (महान नेता) कहा जाता है।
* प्रशासनिक अनुभव: उन्होंने बीकानेर रियासत में राजस्व आयुक्त (Revenue Commissioner) के तौर पर भी अपनी सेवाएं दी थीं
।