Vande Mataram : संसद के मानसून सत्र से पहले ‘वंदे मातरम्’ को लेकर सियासत तेज हो गई है। केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026’ पर विपक्ष ने मोर्चा खोल दिया है। केरल से CPI(M) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर विधेयक वापस लेने की मांग की है।
ब्रिटास का कहना है कि इस विधेयक को जल्दबाजी में लाया जा रहा है। उनका तर्क है कि इतने संवेदनशील विषय पर सभी राजनीतिक दलों से व्यापक चर्चा, संवैधानिक समीक्षा और कानूनी पहलुओं पर गंभीर विचार होना चाहिए। विपक्ष का आरोप है कि यह कानून अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों को प्रभावित कर सकता है, इसलिए इसे बिना विस्तृत बहस के पारित नहीं किया जाना चाहिए।
क्या है सरकार का प्रस्ताव?
सरकार ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971’ की धारा-3 में संशोधन करना चाहती है। प्रस्ताव के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर ‘वंदे मातरम्’ के गायन को रोकता है या गा रही सभा में बाधा डालता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। दोषी पाए जाने पर 3 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।
राज्यसभा में अमित शाह पेश करेंगे बिल
मानसून सत्र के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राज्यसभा में यह विधेयक पेश करेंगे। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के समान कानूनी संरक्षण देना है, ताकि राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े प्रतीकों का अपमान रोकने के लिए कानून और मजबूत बनाया जा सके।
9 जुलाई के निर्देश के बाद बढ़ा विवाद
यह विधेयक ऐसे समय आया है जब 9 जुलाई को गृह मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश दिया था कि सरकारी कार्यक्रमों में ‘जन गण मन’ से पहले ‘वंदे मातरम्’ का गायन या वादन सुनिश्चित किया जाए। अब इसी कड़ी में लाए गए संशोधन विधेयक ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है।
अब निगाहें संसद पर हैं, जहां सरकार इसे राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा का कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे संवैधानिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर सरकार को घेरने की तैयारी में है।