* वैश्विक लोकतंत्र में मतदाता पहचान: अमेरिका से लेकर भारत तक के नियम और प्रणालियां
VoterID : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय वोटर आईडी (EPIC) प्रणाली की सराहना के बाद दुनिया भर में चुनावी पारदर्शिता और मतदाता पहचान पत्र को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ट्रंप ने अमेरिका में फर्जी मतदान पर रोक लगाने के लिए भारत की तर्ज पर अनिवार्य फोटो आईडी लागू करने की पैरवी की है।
दुनिया के अलग-अलग देशों में मतदाता पहचान की व्यवस्थाएं भिन्न हैं…..
1. संयुक्त राज्य अमेरिका (USA)
अमेरिका में कोई केंद्रीकृत राष्ट्रीय पहचान प्रणाली नहीं है। वहां का संघीय ढांचा हर राज्य को मतदान संबंधी नियम तय करने का अधिकार देता है….
* सख्त फोटो आईडी राज्य:ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट या स्टेट आईडी दिखाना अनिवार्य है।
* गैर-फोटो दस्तावेज राज्य: बैंक स्टेटमेंट, बिजली-पानी के बिल या अन्य पते के प्रमाण पत्र स्वीकार किए जाते हैं।
* पहचान पत्र मुक्त राज्य: वॉशिंगटन डी.सी. समेत कई राज्यों में मतदान केंद्र पर किसी आईडी की आवश्यकता नहीं होती; वहां पहचान केवल मतदाता सूची के रिकॉर्ड और हस्ताक्षरों के मिलान से की जाती है।
2. प्रमुख वैश्विक प्रणालियां
मेक्सिको: यहां नेशनल इलेक्टोरल इंस्टीट्यूट (INE) द्वारा 18 वर्ष से ऊपर के नागरिकों को ‘वोटर क्रेडेंशियल’ दिया जाता है। इस कार्ड में फोटो, बायोमेट्रिक्स और तीन सुरक्षित QR कोड शामिल होते हैं, जो बैंकिंग और यात्रा में भी मान्य हैं।
यूरोपीय देश: अधिकांश यूरोपीय देशों में सरकार द्वारा जारी वैध फोटो पहचान पत्र दिखाकर ही मतदान की अनुमति मिलती है।
ब्रिटेन (UK): पारंपरिक रूप से बिना आईडी के मतदान कराने वाला ब्रिटेन भी अब धीरे-धीरे फोटो आईडी अनिवार्यता के नियमों को लागू कर रहा है।
जापान: यहां मतदाताओं को डाक या डिजिटल माध्यम से ‘वोटिंग प्लेस एंट्रेंस टिकट’ भेजा जाता है। केंद्र पर टिकट स्कैन करके पहचान की पुष्टि की जाती है।
चीन: स्थानीय स्तर के चुनावों के लिए ‘रेजिडेंट आईडी’ का उपयोग होता है, जिसमें नागरिक की व्यक्तिगत जानकारी और बायोमेट्रिक डेटा दर्ज रहता है।
भारत का चुनावी पहचान मॉडल: विश्वसनीयता और इतिहास
भारत का मतदाता पहचान तंत्र दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का आधार स्तंभ है…
* ऐतिहासिक पृष्ठभूमि…
1951–52 के पहले आम चुनाव से ही मतदाता सूची की व्यवस्था मौजूद थी, हालांकि उस समय पहचान पत्रों पर फोटो नहीं होते थे।
* EPIC की शुरुआत
फर्जी मतदान रोकने और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए 1993 में भारत निर्वाचन आयोग ने पूरे देश में फोटो पहचान पत्र यानी EPIC (Electors’ Photo Identity Card) की शुरुआत की।
* संरचना
यह कार्ड मतदाता का फोटो, नाम, पता और एक विशिष्ट 10-अंकीय अल्फान्यूमेरिक EPIC नंबर समेटे होता है, जो चुनावी प्रक्रिया में प्रमाणिकता और सुचिता सुनिश्चित करता है।