WestBengal : पश्चिम बंगाल विधानसभा का सोमवार का सत्र बेहद अहम रहने वाला है। भाजपा सरकार अपने चुनावी वादों को तेजी से लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए चार महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी में है। इनमें यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC), OBC आरक्षण संशोधन, पिछड़ा वर्ग आयोग संशोधन और रंगदारी व संगठित अपराध पर सख्ती से जुड़े दो विधेयक शामिल हैं।
अगर UCC विधेयक विधानसभा में पेश होकर पारित होता है, तो पश्चिम बंगाल ऐसा करने वाला देश का चौथा राज्य बन जाएगा। भाजपा का कहना है कि यह कानून सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों में समान नागरिक कानून लागू करेगा, जिससे कानून के सामने सभी की समानता सुनिश्चित होगी।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पहले ही संकेत दे चुके हैं कि राज्य में UCC को गुजरात, उत्तराखंड और असम की तर्ज पर लागू करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। भाजपा का दावा है कि यह उसका पुराना चुनावी वादा है और सरकार इसे प्राथमिकता के आधार पर पूरा करेगी।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया है कि संविधान के अनुच्छेद 366(25) और 342 के तहत मान्यता प्राप्त अनुसूचित जनजातियों (ST) को UCC के दायरे से बाहर रखा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस कानून का परिवार नियोजन या जनसंख्या नियंत्रण से कोई संबंध नहीं है।
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस (TMC) और अन्य विपक्षी दलों ने प्रस्तावित विधेयकों का कड़ा विरोध करने का ऐलान किया है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी विधायकों को विधानसभा के भीतर और बाहर सरकार को घेरने के निर्देश दिए हैं। उनका आरोप है कि UCC देश की विविधता और संवैधानिक मूल्यों पर सवाल खड़ा करता है।
वहीं, रंगदारी और संगठित अपराध पर लगाम लगाने वाले विधेयकों को लेकर भी विपक्ष हमलावर है। टीएमसी का आरोप है कि इन कानूनों में बिना मुकदमे के लंबे समय तक हिरासत जैसे प्रावधान लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर कर सकते हैं और इन्हें UAPA व MISA से भी अधिक कठोर बताया जा रहा है।
ऐसे में सोमवार का विधानसभा सत्र केवल विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति और भविष्य के कानूनी ढांचे की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण दिन साबित हो सकता है।