G7 Summit 2026: वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के बदलते परिदृश्य के बीच भारत एक बार फिर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंचों में से एक G7 शिखर सम्मेलन में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को फ्रांस के एवियन (Evian) शहर पहुंच गए, जहां वह दो दिवसीय G7 Summit 2026 में हिस्सा लेंगे। यह लगातार सातवां अवसर है जब प्रधानमंत्री मोदी G7 शिखर सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं। भारत की यह लगातार मौजूदगी वैश्विक मंच पर देश की बढ़ती भूमिका और प्रभाव को दर्शाती है।
एवियन पहुंचते ही दुनिया को दिया भारत का संदेश
फ्रांस पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि वह विश्व नेताओं के साथ वैश्विक चुनौतियों पर सार्थक चर्चा को लेकर उत्साहित हैं। उन्होंने दोहराया कि भारत एक टिकाऊ, समृद्ध और संतुलित वैश्विक व्यवस्था के निर्माण के लिए सभी देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। माना जा रहा है कि सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्षेत्रीय संघर्ष जैसे अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा होगी।
स्विट्जरलैंड में हुआ गर्मजोशी से स्वागत
फ्रांस पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने स्विट्जरलैंड के जिनेवा में संक्षिप्त प्रवास किया, जहां स्विस राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय सहयोग, निवेश, नवाचार और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा हुई। इसके बाद प्रधानमंत्री जिनेवा से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित एवियन के लिए रवाना हुए।
भारत की 13वीं और मोदी की लगातार 7वीं भागीदारी
भारत इस बार G7 शिखर सम्मेलन में 13वीं बार हिस्सा ले रहा है। हालांकि भारत G7 का स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन पिछले कई वर्षों से उसे लगातार विशेष आमंत्रण मिल रहा है। विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारत की स्थिति, उसकी रणनीतिक अहमियत और ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज बनने के कारण उसका महत्व लगातार बढ़ रहा है।
ग्लोबल साउथ की आवाज बुलंद करेगा भारत
इस सम्मेलन में भारत की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका विकासशील देशों की चिंताओं को वैश्विक मंच पर मजबूती से रखना होगी। खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु वित्त, सतत विकास और वैश्विक आर्थिक असमानता जैसे मुद्दों पर भारत अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रख सकता है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने ग्लोबल साउथ के हितों को अंतरराष्ट्रीय एजेंडे का अहम हिस्सा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
नई वैश्विक साझेदारियों पर होगा मंथन
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों प्रधानमंत्री मोदी का औपचारिक स्वागत करेंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री उच्च स्तरीय सत्र में शामिल होंगे, जिसका विषय है—”नई साझेदारियों का निर्माण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना।” इस बैठक में G7 देशों के नेताओं के साथ विश्व बैंक, अफ्रीकी विकास बैंक और अन्य साझेदार देशों के शीर्ष प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे।
कई अहम नेताओं से होगी द्विपक्षीय मुलाकात
G7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान सहित कई प्रमुख नेताओं से द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इन बैठकों में व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।
ट्रंप-मोदी मुलाकात पर टिकी दुनिया की नजर
प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ प्रस्तावित मुलाकात को इस दौरे का सबसे अहम क्षण माना जा रहा है। दोनों नेताओं के बीच रक्षा सहयोग, व्यापार, उभरती प्रौद्योगिकियां, ऊर्जा साझेदारी, इंडो-पैसिफिक रणनीति और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होने की उम्मीद है। साथ ही रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया की स्थिति और बदलते वैश्विक समीकरणों पर भी दोनों नेता विचार-विमर्श कर सकते हैं।
भारत के लिए क्यों खास है G7 Summit 2026?
अब G7 केवल विकसित देशों का मंच नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक चुनौतियों पर सामूहिक समाधान तलाशने का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। भारत के लिए यह सम्मेलन अपनी आर्थिक ताकत, रणनीतिक महत्व और वैश्विक नेतृत्व क्षमता को प्रदर्शित करने का सुनहरा अवसर है। ऐसे समय में जब दुनिया आर्थिक अस्थिरता, युद्ध, जलवायु संकट और ऊर्जा सुरक्षा जैसी चुनौतियों से जूझ रही है, G7 Summit 2026 में भारत की भूमिका पर पूरी दुनिया की विशेष नजर बनी हुई है।