Gandhi : पापा गांधी बनाम बेटा गांधी

Siddarth Saurabh

नीतिगत समावेश बनाम ‘एलीट’ विरासत

Gandhi : ​भारतीय राजनीति में गांधी परिवार की दो पीढ़ियों के बीच का अंतर केवल समय का नहीं, बल्कि उनके परिवेश और प्राथमिकताओं का भी है। पूर्ववर्ती दौर में ‘पापा गांधी’ का कालखंड उनके उन मित्रों और सहयोगियों के इर्द-गिर्द सिमटा था, जो एलीट क्लास का प्रतिनिधित्व करते थे—चाहे वे एनआरआई कैप्टन सतीश शर्मा हों, होटल व्यवसायी ललित सूरी हों, या फिर अमिताभ बच्चन और सैम पित्रोदा जैसी हस्तियां। उस दौर की ‘बैठकी’ और विमर्श विशिष्ट वर्गों तक सीमित थे।
​आज ‘बेटा गांधी’ (राहुल गांधी) कॉर्पोरेट प्रबंधन और शीर्ष नौकरशाही में दलितों और पिछड़ों की हिस्सेदारी की बात तो करते हैं, लेकिन आलोचकों का मानना है कि इस विमर्श में भी आदिवासी समाज की अनदेखी की जाती है। सबसे बड़ी अनिश्चितता उनके राजनीतिक निरंतरता को लेकर है; देश में किसी बड़े बदलाव के प्रयासों के बीच उनका अचानक यूरोप प्रवास पर चले जाना, उनके नेतृत्व की गंभीरता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।

2014 का सत्ता परिवर्तन: वणिक पुत्रों का उदय और बुनियादी ढांचा

​वर्ष 2014 भारतीय राजनीति का ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हुआ। सत्ता की कमान उन ‘वणिक पुत्रों’ के हाथ में आई, जो जमीन से जुड़े और छोटे असंगठित व्यवसायों वाले परिवारों से निकले थे। परिणाम स्वरूप, आज वह विकास धरातल पर दिख रहा है जिसकी प्रतीक्षा दशकों से थी।

  • ​पूर्वोत्तर का कायाकल्प: आजादी के साठ वर्षों तक हाशिए पर रहे सिक्किम और मिजोरम जैसे राज्यों तक रेल कनेक्टिविटी का पहुंचना केवल इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, बल्कि आदिवासी और ‘जेनेटिक माइनॉरिटीज’ के सशक्तिकरण का प्रतीक है।

* ​रणनीतिक बढ़त: अरुणाचल प्रदेश में एक्सप्रेसवे का निर्माण और चीन की चुनौतियों के बीच ‘डाउनस्ट्रीम डैम’ को दी गई मंजूरी भारत के दृढ़ संकल्प को दर्शाती है।

​3. प्रतिनिधित्व का ऐतिहासिक क्षण: डॉ. जोराम अनिया का आगमन

​शीर्ष नीतिगत संस्थानों में प्रतिनिधित्व की बात अब केवल नारों तक सीमित नहीं है। डॉ. जोराम अनिया को नीति आयोग का सदस्य बनाना एक युगांतकारी निर्णय है। यह राष्ट्रीय नीति-निर्माण के सर्वोच्च स्तर पर अरुणाचल प्रदेश की एक प्रखर बौद्धिक आवाज़ को स्थान देता है।

* ​शैक्षणिक अनुभव: डॉ. अनिया एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद और ‘अरुणाचल प्रदेश निजी शैक्षिक नियामक आयोग’ (APPERC) की सदस्य के रूप में 18 वर्षों का समृद्ध अनुभव रखती हैं।

* ऐतिहासिक उपलब्धि: वह नीशी (Nyishi) समुदाय की पहली महिला हैं जिन्होंने पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त की है। साथ ही, हिंदी भाषा में पी.एच.डी. करने वाली राज्य की पहली महिला बनकर उन्होंने सांस्कृतिक सेतु का कार्य किया है।
एक तरफ अंडमान निकोबार में रणनीतिक नौसेना पोर्ट का निर्माण हो रहा है, तो दूसरी तरफ चीन की सीमाओं से लगे अरुणाचल प्रदेश की प्रतिभा को देश के शीर्ष पद पर बिठाकर केंद्र सरकार ने एक बड़ा कूटनीतिक और राजनीतिक संदेश दिया है। डॉ. जोराम अनिया की नियुक्ति उन लोगों के लिए एक ठोस जवाब है, जो केवल प्रतिनिधित्व की राजनीति करते हैं, जबकि वर्तमान सत्ता इसे क्रियान्वित कर रही है।

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