Major Anuj Sood :  शौर्य की पराकाष्ठा और एक ‘वीर नारी’ का अटूट संकल्प

Bindash Bol

Major Anuj Sood : 3 मई 2020—जब पूरा भारत कोरोना के सन्नाटे में घरों में कैद था, तब कश्मीर के हंदवाड़ा में सन्नाटा गोलियों की गूँज से टूट रहा था। यह कहानी है भारतीय सेना के उन पाँच जाँबाज़ों की, जिन्होंने देश और मानवता की रक्षा के लिए ‘स्वयं से पहले सेवा’ के मंत्र को जीकर दिखाया।

हंदवाड़ा: वो आखिरी मोर्चा

आतंकियों ने एक घर में मासूम नागरिकों को बंधक बना रखा था। कर्नल आशुतोष (21 RR के कमांडिंग ऑफिसर), मेजर अनुज सूद, नायक राजेश कुमार, लांस नायक दिनेश सिंह और सब-इंस्पेक्टर शकील काज़ी की टीम उस घर के बाहर डटी थी।
ऑपरेशन के दौरान इन वीरों ने बार-बार आतंकियों को आत्मसमर्पण करने का मौका दिया, क्योंकि प्राथमिकता बंधकों की जान बचाना थी। एक पल ऐसा आया जब लगा कि आतंकी हथियार डाल देंगे, लेकिन कायरता का परिचय देते हुए उन्होंने मासूमों को ‘ह्यूमन शील्ड’ बनाया और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। अपनी टीम और बंधकों को सुरक्षित निकालने की कोशिश में, इन पाँचों शूरवीरों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी।

मेजर अनुज सूद: प्रतिभा, प्रेम और बलिदान

​मेजर अनुज सूद की दास्तां साहस और सादगी का एक अद्भुत संगम है। उन्होंने IIT जैसा कठिन एग्जाम क्रैक किया था, लेकिन उनके दिल में अपने पिता की तरह वर्दी पहनने का जुनून था।

* अधूरे ख्वाब: शहादत से ठीक चार महीने पहले वो अपनी सगाई का सूट पसंद कर रहे थे। आकृति सूद के साथ उनकी शादी को अभी सिर्फ चार महीने ही बीते थे।

* अमर प्रेम की निशानी: आज भी आकृति सूद अपनी सगाई की अंगूठी को एक चैन में पिरोकर अपने गले में पहनती हैं—जैसे अनुज का दिल उनके करीब धड़क रहा हो।

* शौर्य का सम्मान: जब आकृति सूद राष्ट्रपति भवन में मेजर अनुज का ‘शौर्य चक्र’ लेने पहुँचीं, तो उनके मासूम चेहरे पर जमी उदासी और गर्व को देखकर तत्कालीन राष्ट्रपति की आँखें भी नम हो गई थीं।

वीर नारी का संकल्प

​आकृति सूद आज भी भोपाल के ‘शौर्य स्मारक’ जाती हैं, जहाँ अनुज का नाम पत्थर पर उकेरा गया है। वो उनके पदकों और शौर्य चक्र को आज भी उसी गरिमा के साथ सँभालकर रखती हैं, जैसा कि मेजर अनुज खुद रखते।

“जब तक सांस है, सम्मान कम नहीं होने दूंगी।”

​मेजर अनुज सूद ने अपने आखिरी स्टेटस में भी खुद के लिए हिम्मत और सम्मान की ही इच्छा जताई थी। आज वीर नारी आकृति सूद, मेजर अनुज के उसी सम्मान की रक्षक बनकर समाज के सामने एक मिसाल पेश कर रही हैं।

हंदवाड़ा के वो पाँच शहीद आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी वीरता की खुशबू कश्मीर की वादियों और आकृति सूद जैसी वीरांगनाओं के हौसले में हमेशा ज़िंदा रहेगी। यह रिपोर्ट उन शहीदों और उनके परिवारों के त्याग को शत-शत नमन करती है।

Share This Article
Leave a Comment