रेहान
Indian Cricket : हार जीत होती रहती है,आयरलैंड वाले मेहनती है, काबिल है,और आज से नहीं, सालों से अपनी पहचान बनाने के लिए लड़ रहे थे,और इससे बेहतर क्या होता कि वो वर्ल्ड चैंपियंस को घर बुलाकर क्लीन स्वीप करके वापस भेज दे।
पर शायद इस टूर्नामेंट में गंभीर ने हार से बड़ी गलती की है वैभव को मैदान में न उतारकर। मतलब आप सोच कर देखिए कि कितनी नाइंसाफी कर रहे है ये लोग वैभव के साथ वो भी बिना कारण।
वैभव के साथ जो हुआ,उसे देखकर धोनी जैसे मेंटर की याद आती है, जो खिलाड़ियों को छेड़ता नहीं था, बस खुला छोड़ देता था, जाओ जो करना है, मै हू तुम्हारे पीछे। गंभीर के साथ दिक्कत ये है कि वो खिलाड़ियों के आगे आगे रहना चाहते है,पीछे नहीं।
इसलिए गंभीर कभी धोनी नहीं बन सकते है, जबकि ख्वाहिश गंभीर की धोनी से ऊंचा बनने की रहती है,पर दिक्कत ये है कि गंभीर का कोई फिक्स पैटर्न ही नहीं है,कोई फिक्स पर्सनेलिटी नहीं है, जब भी बोलता है तो ऐसा लगता है मानो उसके दिमाग में रहता है कि ऐसा क्या बोल दूं जिससे एडिट में मेरी आंखों से लेजर निकाल कर रील बन जाए।
वैभव सूर्यवंशी को न खिलाना ऐसा ही एक फैसला था जिससे गंभीर ये दिखाते कि वो दूसरे कोचेस की तरह नहीं है। और ये सही भी है, गंभीर जैसा कोच की नहीं हो सकता,क्यूंकि दूसरे कोचेस रणजी से टेस्ट के प्लेयर उठाते थे और आईपीएल से टी 20 और वनडे के प्लेयर्स,गंभीर भाई के आने के बाद से कोई कही से भी उठाया जा रहा है, कल को गंभीर भईया किसी बैडमिंटन टूर्नामेंट से एक खिलाड़ी लेकर आयेंगे और कप्तान बना देंगे।
मतलब दुनिया भर के क्रिकेट एक्सपर्ट खौफ खाए बैठे है जिस खिलाड़ी से,उसे आपने पल्लू में छुपा रखा है।और क्यू? इसे आप समझा ही नहीं सकते क्योंकि क्रिकेट के बेसिक चीज आपकी बाते काट देंगी।
सब जानते है कि,क्रिकेट की दुनिया में फ्लो या फॉर्म की बहुत वैल्यू होती है, जब कोई खिलाड़ी भीषण फॉर्म में होता है, तो मैनेजमेंट कप्तान उससे बात करना तक बंद कर देता ह,कई मामले में उसे टीम मीटिंग में भी नहीं रखते कि,तुम जो कर रहे है, वो करो, प्लानिंग वगैरह की टेंशन मत लो।
पर जब आप किसी फॉर्म के बह रह खिलाड़ी को खेलने नहीं देते है, तो उसका फ्लो टूटता है, उसका कॉन्फिडेंस हिलता है, और जो बच्चा बिना सोचे समझे बस बल्ला घुमाता था,अब शायद सोचने लगेगा, अब उसके मन में डाउट्स आयेंगे कि यार कोच को इंप्रेस नहीं किया तो ये खिलाएगा नहीं।
और समझ नहीं आता कि किस चीज से बचा रहे हो आप उसे? किस चीज का डर है आपको? वैभव के पिता खुद एक क्रिकेटर थे, उन्होने वैभव को हर उस सिचुएशन के लिए तैयार किया है,जिस सिचुएशन में अच्छे अच्छो के पैर कांपते है।और सिर्फ फिजिकली नहीं मेंटली भी,आप वैभव की बाते सुना करिए पोस्ट मैच प्रेजेंटेशन में, इस लड़के को पता है कि वो क्या कर रहा है उसे क्या करना है,ये क्लेरिटी उसे अपने पिता और बाद में बाकी कोचेस से मिली,पर गंभीर ठहरे अलग तरह के आदमी।
अभी आगे इंग्लैंड की सीरीज है, वहा अलग कंडीशन है, अलग हालात है, आप वैभव को उससे पहले आयरलैंड में डेव्यू कराते,वो थोड़ा खराब खेलता वो, थोड़ी ग़लतियाँ करता,पर उसे ठीक करने का मौका मिलता।और दिक्कत ये है कि साला कोच को भी मालूम है कि वैभव तो आज नहीं कल खेलेगा ही।
आज आयरलैंड में खिलाते तो शायद,इंग्लैंड में वो अपने आपको और बेहतर प्रूव कर पाता। अभी लोगो को पता है कि वैभव का आगे का सफर आईपीएल जितना आसान नहीं होगा,पर आसान तो 15 साल के लड़के का ऑरेंज कैप जीतना भी नहीं होता,पर किया न इसने?
वैभव जैसे वांस इन पीढ़ी,प्लेयर को आपको एक साल का कुशन तो देना ही पड़ेगा। कुशन मतलब वैभव को अभी खुद समझने दो,खुद सीखने दो, एडॉप्ट करने दो। नाबालिग के कारण उसको वैसे ही ड्रेसिंग रूम से दूर किया गया था,खिलाया आपने है नहीं, तो भाई को गोल क्या रोटिया सिकवानें ले गए थे?
अरे बेसिक चीजे वैभव के पिता उसे बचपन से सिखा रहे है, और यकीन मानिए, वैभव सूर्यवंशी के पिता ने ये सारी मेहनत वैभव को आपीएल का सबसे बड़ा प्लेयर बनाने के लिए नहीं की थी, वैभव के पिता जी ने,अपने लड़के को वर्ल्डकप जीतने के लिए तैयार किया है। और ये जीतेगा भी बस उसे खेलने दीजिए,उसको मैदान में ही फसाए रखिए।
जो लड़का 300 से ज्यादा के स्ट्राइक रेट से 90 रन मारने के बाद भी आउट होता है तो रोने लगता है,वो मैच याद है,जिसमें वैभव आउट होकर डगआउट की तरफ इतना धीमे धीमे चल रहा था, मानो उसे यकीन ही न हो रहा हो कि वो कैसे आउट हो गया।
सोचिए ऐसे लड़के को दो मैच आप,खिलाये ही नहीं तो क्या हाल होगा उसके मन का,भले सामने से वो बड़ो वाली बाते बोले कि कोई बात नहीं,पर बच्चा ही तो है वो, उसको दुख होगा ही होगा,क्योंकि उस बच्चे को आप क्या रीजन देंगे कि बेटा तुम्हे क्यू नहीं खिलाया गया?
और अब तो मेरी यही दुआ है कि, वैभव अब तभी टीम में आये जब ये गंभीर निकल जाए,वरना इस आदमी की अजीब अजीब हरकतों और फैसलों से, वैभव को कन्फ्यूज कर देगा, जैसे पूरी भारतीय टीम आज कन्फ्यूज दिखती है।
और वैभव के खेल का सबसे इंपोर्टेंट पार्ट है,उसका कॉन्फिडेंट,उसको भरोसा है अपने आप आर,स्किल्स पर,वो सोचता नहीं,बस मारता है, लेकिन जब मैनेजमेंट ही उसपर भरोसा नहीं करेगा,तो वो कन्फ्यूज होगा, और ये कंफ्यूजन ये अनसरटेंनीटी उसके खेल में भी आ जाएगी,जिसे वैभव के पिता ने अपनी पूरी उम्र और सारी पूजी लगाकर भी, वैभव के खेल में कभी आने नहीं दिया था।
गंभीर की सनक के शिकार बहुत खिलाड़ी हुए है, बहुत कुछ बर्बाद किया इस आदमी के बेसिर पैर के फैसलों ने,पर अगर गंभीर वैभव को छूने गए,तो शायद ये उनके करियर का अंत होगा, कोचिंग नहीं, कमेंट्री से भी ये जाएंगे, क्योंकि वहां भी इन्हें इसी के गुणगान गाने होंगे,जैसे हाथ बंधे मुंह फुलाये वो इस तस्वीर में खड़े दिख रहे है।