Indian Politics : अहंकार की राजनीति अल्पजीवी

Nishikant Thakur

Indian Politics : श्रीमदभगवतगीता में स्वयं श्रीकृष्ण ने कहा है कि अहंकार हमारे जीवन को अंधकार में धकेलता है । जो अपने में नहीं है, वह दिखाना , वह बताना दंभ है , ढोंग है, पाखंड है ।  गीता को भगवान श्रीकृष्ण के मुख से निकला अमृत वचन और सर्वोच्च आध्यात्मिक ज्ञान का ग्रंथ माना गया है। गीता केवल धार्मिक पुस्तक नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला, मोक्ष का मार्ग और मानव चेतना का सर्वोच्च शास्त्र है। सनातन का  अनुयायी बताने वाला कोई कैसे दंभ भरते हुए कह सकता है कि “कांग्रेस डूबता जहाज है जिस पर कोई सवार नहीं होगा”।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्षी दल अगर कांग्रेस में शामिल भी हो जाते हैं तो हमारे लिए राजनीतिक तौर पर और भी गुंजाइश है ।  बताते  चलें कि प्रधानमंत्री  ने 2014 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान पहली बार ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ का नारा दिया था । उन्होंने अपनी रैलियों में इस नारे का इस्तेमाल कांग्रेस की नीतियों, भ्रष्टाचार और कार्यसंस्कृति पर निशाना साधने के लिए किया था । बाद में, एक साक्षात्कार में उन्होंने स्पष्ट किया था कि इसका मतलब कांग्रेस पार्टी को पूरी तरह से मिटाना नहीं, बल्कि देश को ‘कांग्रेस की संस्कृति और विचारधारा’ (परिवारवाद, भ्रष्टाचार) से मुक्त करना है।  उनका तर्क था कि भारत को भ्रष्टाचार, परिवारवाद और वोट-बैंक की उस राजनीति से आजादी की जरूरत है, जिसे वे ‘कांग्रेस संस्कृति’ कहते हैं। 
 
फिलवक्त, देश के तीन राज्यों में घमासान मचा हुआ या यह भी कहा जा सकता है कि घमासान  मचा  दिया गया है तो,  कोई अतिशयक्ति नहीं होगी । अभी कुछ दिन पहले आम आदमी पार्टी के राज्य सभा सांसद 24 अप्रैल 2026 को पार्टी छोड़ गए थे। इस घटनाक्रम के तहत राज्यसभा में ‘आप’ के कुल 10 सांसदों में से सात (दो-तिहाई सांसद) ने राघव चड्ढा के नेतृत्व में पार्टी छोड़ी थी और भारतीय जनता पार्टी  में विलय की घोषणा की थी। सच तो यह है कि आम आदमी पार्टी के जिन सात राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़ी थी दरअसल, वे राजनीतिज्ञ थे ही नहीं । वे अपने धनबल, बाहुबल से राजनीति में प्रवेश कर गए थे और दूसरी ओर  जिन्होंने आम आदमी पार्टी को ध्वस्त करने के इरादे से उन्हें पार्टी छोड़ने के लिए मजबूर किया,  वे देश में एक छत्र राज्य करना चाहते हैं । जाहिर है जिन्होंने विपक्ष में बने रहने से सत्ता पक्ष में जाना बेहतर समझा वे हवा का रुख भांप कर भाजपा में चले गए। चूंकि  पंजाब में अब तक कांग्रेस , अकाली दल ने शासन किया और भारतीय जनता पार्टी वहां सत्ता से काफी दूर रही । इसलिए केंद्रीय सत्तारूढ़ दल ने निश्चय किया कि जिस तरह से भी हो पंजाब की सत्तारूढ़ सरकार को अगले होने वाले विधान सभा चुनाव में पंगु किया जा सके । यही तो केंद्रीय सरकार की अब तक की नीति रही है , जिसमें वह अभी तक सफल भी रही है ।
 
महाराष्ट्र के विपक्षी दलों में ‘भगदड़’ की चर्चा मुख्य रूप से उद्धव ठाकरे की पार्टी (शिवसेना-यूबीटी) में संभावित टूट और बड़े नेताओं के सत्तारूढ़ गठबंधन (महायुति) के संपर्क में होने की अटकलों के कारण हो रही है। इस राजनीतिक हलचल के कारण राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसद और विधायक पार्टी नेतृत्व से असंतुष्ट होकर सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं के संपर्क में हैं। बागी नेताओं का आरोप है कि पार्टी का नेतृत्व कार्यकर्ताओं और जन प्रतिनिधियों की अनदेखी कर रहा है और वे अपने मूल सिद्धांतों से भटक गए हैं।  राज्य में हाल ही में हुए विधान परिषद चुनावों के समय भी विपक्षी दलों (महाविकास आघाड़ी) में सीटों के बंटवारे को लेकर मतभेद खुलकर सामने आए थे, जिसके बाद से नेताओं के पाला बदलने की अफवाहें तेज हो गई हैं। 
हालांकि, शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेताओं ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज किया है और इसे विरोधियों द्वारा फैलाई गई अफवाह बताया है। 

अब पश्चिम बंगाल की बात करें तो वहां तो बिल्कुल अति हो गई है । कल तक जिन सांसदों और विधायकों ने पूर्व मुख्यमंत्री को देवी के रूप में देखा, वही आज उनकी कमियों को गिनाते नजर आ रहे हैं । ऐसा क्या रातों रात बदल गया जिसने राज्य की राजनीति सहित देश की राजनीति में जलजला ला दिया है । सच तो यह है कि आज की राजनीति आजादी के लिए नहीं सत्ता पर काबिज होने के लिए ही सब करने लगे हैं । तृणमूल कांग्रेस पार्टी के पराजित होने के बाद उसकी क्या दुर्दशा होगी इसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था, लेकिन जो हो रहा है उस पर भी विश्वास करना मुश्किल हो गया । अभी तक जिन सांसदों ने खुलकर सुश्री ममता बनर्जी का समर्थन किया है वे कीर्ति आजाद ही हैं, लेकिन जिस सयानी घोष को पूर्व मुख्यमंत्री का सबसे करीबी माना जाता था उनका पलटना तो अविश्वसनीय है , लेकिन सच है । यह बात तो देश में की ही जा रही है कि देश की राजनीति में धुंआधार “हॉर्स ट्रेडिंग” हो रही है । यहां तक कि तृणमूल सांसद कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया को साक्षात्कार देते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी की ओर से उन्हें भी लोभ दिया गया था। सच और झूठ का पता आज नहीं तो कल चलेगा ही, लेकिन इतनी बात जरूर है कि जिन सांसदों ने तृणमूल कांग्रेस से अलग होने के लिए लोकसभा अध्यक्ष को आवेदन दिया है और परोक्ष रूप से कहा है कि उनके दल का  समर्थन एनडीए को रहेगा, तो उससे भी एक स्पष्ट संकेत  मिलता है कि उनको कुछ विशेष देने या धमकाने का कार्य किया गया हो । आरोप तो यहां तक लगाया जा रहा है कि अब तक जितनी भी सरकारें देश में राज्यों की  गिरी है उसके पीछे भारतीय जनता पार्टी द्वारा किसी न किसी रूप में डराया – धमकाया जाना ही रहा  है अथवा लोभ देकर उन्हें अपने पक्ष में कर लिया  गया है। आज जो लोग सुश्री ममता बनर्जी की इतनी कमियों को गिना रहे है , क्या उनमें उतना उस समय दम नहीं था , जब उनकी सत्ता थी । अचानक राजनीति में ऐसा परिवर्तन आना निश्चित रूप से देश के लिए अभिशाप ही सिद्ध होने वाला कहा जा सकता है । 

कुछ भी हो देश की राजनीति वैसी नहीं रही जिसकी कल्पना इतिहासकारों ने आजादी के काल में की थी । ऐसा क्या अचानक राजनीति में हो गया कि ‘आयाराम गया राम’ की स्थिति दोहराई जा रही है । आज भारत ही नहीं विश्व के सभी देशों में कुछ समय बाद सत्ता परिवर्तन होता रहता है । सत्ता में वर्षों बने रहना केवल वंशवाद काल  में ही होता रहता था, लेकिन अब विश्व की राजनीति बदल गई। सभी देश और सारे राजनीतिज्ञ जनतंत्र की ही बात करते है जहां शासन का कुछ समय में बदलना तय माना जाता है । कुछ समय पहले तक विश्व में जहां कहीं भी वंशवाद की राजनीति होती थी अब बदल गई है और जनतांत्रिक समाज में सभी विश्वास करने लगे हैं । बड़े बड़े राजनीतिक विश्लेषकों का यही मानना है कि जब तक सत्ता में परिवर्तन नहीं होगा समाज देश का विकास नहीं हो सकता । भारत में जनतांत्रिक तरीके से कांग्रेस ने भी जमीनी स्तर की राजनीति की है,  लेकिन  इतिहास से अनभिज्ञ लोगों को यह बात अप्रिय लगती  है। उन्हें लगता है कि कांग्रेस ने आजादी के लिए योगदान नहीं दिया और सत्ता हथियाने के लिए देश का बंटवारा तक करवा दिया और अब वह डूबता हुआ जहाज है । यह सच नहीं है।  बल्कि सच तो यह है अब तक देश की  नींव को मजबूत करने में कांग्रेस के योगदान को किसी तरह से नकारा  नहीं जा सकता । अतः किसी का यह कहना कि कांग्रेस डूबता जहाज है, सच नहीं है । जैसा कि पूर्व प्रधानमंत्री और भारतीय राजनीति के कद्दावर नेता अटल बिहारी बाजपेई स्वयं कहा करते थे कि सरकारें तो बदलती रहती है और सत्ता तो आती – जाती रहती है , लेकिन किसी को नीचा दिखाना  एक अहंकार है और अहंकार किसी का लंबे समय तक टिक नहीं सकता। एक दिन उसे भी आसमान में उड़ने की जगह जमीनी स्तर पर आना ही होगा ।

(लेखक वरिष्ट पत्रकार और स्तंभकार हैं)

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