Jammu Kashmir : कश्मीर घाटी में एक बार फिर आतंकी धमकियों और खुफिया इनपुट्स ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) से ठीक पहले उपजे गंभीर सुरक्षा खतरों को देखते हुए जम्मू-कश्मीर सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। घाटी में तैनात सैकड़ों कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को 25 अगस्त तक ड्यूटी पर न आने और तुरंत सुरक्षित स्थानों पर चले जाने की हिदायत दी गई है।
क्या आतंकी हिट लिस्ट और खुफिया इनपुट हैं इसकी वजह?
इस पूरे कदम के पीछे लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी संगठनों की वह कथित धमकी भरी चिट्ठी है, जिसने पूरी घाटी में हड़कंप मचा दिया। इस चिट्ठी में कई कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के नाम और उनके संपर्क ब्योरे शामिल थे।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, 15 अगस्त के मद्देनजर घाटी में हाई अलर्ट है। ऐसे में आतंकियों के नापाक मंसूबों को नाकाम करने और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह एहतियाती ‘प्रशासनिक ब्रेक’ दिया गया है। जो कर्मचारी घाटी से बाहर नहीं जा सकते, उन्हें अपने कमरों में ही रहने और अनावश्यक बाहर न निकलने की सख्त सलाह दी गई है।
पीएम पैकेज कर्मचारियों पर बार-बार निशाना क्यों?
घाटी में लगभग 6,000 कश्मीरी पंडित कर्मचारी तैनात हैं, जिन्हें 2010 में ‘प्रधानमंत्री विशेष रोजगार पैकेज’ के तहत पुनर्वास योजना के जरिए नौकरियां दी गई थीं। हालांकि, साल 2022 की टारगेटेड किलिंग्स की भयावह यादें अभी धुंधली भी नहीं पड़ी थीं कि एक बार फिर इन कर्मचारियों के सिर पर सीधे हमले का खतरा मंडराने लगा है।
एलओसी से जंगलों तक सुरक्षा बलों का सख्त घेरा: कहाँ-कहाँ चल रहा है सर्च ऑपरेशन?
घाटी में केवल धमकियों की जांच ही नहीं चल रही, बल्कि जमीनी स्तर पर आतंकियों की तलाश में भीषण सर्च ऑपरेशन जारी हैं..

* पुंछ टनल के पास क्या हुआ? मेंढर सेक्टर में एक सुरंग निर्माण स्थल पर तैनात गार्ड द्वारा संदिग्धों को देखे जाने और फायरिंग के बाद भाटा दुरियन, संगीओट और आसपास के घने जंगलों को सील कर दिया गया है।
* त्रिकोणीय सर्च ऑपरेशन: पुलिस, एसओजी (SOG) और सीआरपीएफ की संयुक्त टीमें सुरनकोट, मनकोट और पीर पंजाल के बीहड़ इलाकों में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चला रही हैं।
* राजौरी और नौशेरा में एलओसी पर चौकसी: स्थानीय ग्रामीणों द्वारा संदिग्धों को देखे जाने की रिपोर्ट के बाद सीमावर्ती इलाकों में गश्त दोगुनी कर दी गई है।
आतंकियों की कमर तोड़ने के लिए चलाए जा रहे इन अभियानों के बीच प्रशासन का मुख्य ध्यान यही है कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर किसी भी तरह की बड़ी अप्रिय घटना को हर हाल में रोका जा सके।