Jharkhand : धनबाद में प्रशासनिक चूक या बड़ा प्रयोग? आठवीं पास महिला बनी मजिस्ट्रेट

Bindash Bol

* आठवीं पास महिला को सौंपी कानून व्यवस्था की कमान!

* होमगार्ड भर्ती में माता समिति संयोजिका को मिली दंडाधिकारी की जिम्मेदारी

Jharkhand :झारखंड के धनबाद से सामने आया मामला प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। होमगार्ड भर्ती जैसे संवेदनशील और जिम्मेदारी भरे कार्य में जिला प्रशासन ने एक ऐसी महिला को दंडाधिकारी (मजिस्ट्रेट) की जिम्मेदारी सौंप दी, जो केवल आठवीं पास हैं और स्कूल की माता समिति की संयोजिका हैं। यह फैसला सामने आते ही पूरे जिले में चर्चा और हैरानी का माहौल बन गया।

महिला को प्रशासन के एक आदेश ने परेशानी में डाल दिया है। मात्र आठवीं कक्षा तक शिक्षित इस महिला को जिला प्रशासन ने होमगार्ड के जवानों की भर्ती में दंडाधिकारी, यानी मजिस्ट्रेट नियुक्त कर दिया है। अब महिला परेशान है कि वह क्या करे? महिला मध्य विद्यालय धैया में माता समिति की संयोजिका है। उसे समझ नहीं आ रहा कि उसे दंडाधिकारी क्यों बना दिया गया?

महिला को मिली हिंदी लेखन क्षमता की जांच का जिम्मा

मध्य विद्यालय धैया में माता समिति की रूपम देवी देवी मध्याह्न भोजन योजना समिति की संयोजिका हैं। वे आठवीं कक्षा तक पढ़ी हैं। उनको 18 अप्रैल को विधि व्यवस्था कोषांग की ओर से जारी किया गया एडीएम लॉ एंड ऑर्डर का एक पत्र मिला। इस पत्र में लिखा है कि, उच्च विद्यालय धनबाद की आशा कुमारी के स्थान पर रूपम देवी, संयोजिका मध्य विद्यालय को दंडाधिकारी प्रतिनियुक्त क्या जाता है। उनको लिखित परीक्षा और शारीरिक योग्यता परीक्षा में सफल उम्मीदवारों की हिंदी लेखन क्षमता की जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है।

कैसे बना दिया दंडाधिकारी? तनाव में रूपम देवी

अब सवाल उठ रहा है कि आठवीं तक शिक्षित रूपम देवी होमगार्ड जवानों की भर्ती परीक्षा में शामिल होने वालों की हिंदी लेखन क्षमता की जांच कैसे करेंगी? धनबाद प्रशासन के पत्र से हैरान और परेशान रूपम देवी के मुताबिक उन्हें शनिवार को उनके मोबाइल फोन पर यह पत्र मिला था। इसमें उन्हें सूचना दी गई है कि उन्हें दंडाधिकारी के पद पर प्रतिनियुक्ति दी गई है। उन्होंने बताया कि वे अधिक पढ़ी-लिखी नहीं हैं और यह जिम्मेदारी मिलने से तनाव में हैं। उनके मुताबिक वे मध्याह्न भोजन के लिए सामान लेकर आती हैं और बच्चों को खाना खिलाती हैं। वे हैरत में हैं कि उनका नाम दंडाधिकारी के पद के लिए कैसे आ गया।

नियुक्ति में गलती कहां हुई?

धनबाद के बिरसा मुंडा कॉम्पलेक्स में होमगार्ड भर्ती परीक्षा चल रही है। इसमें रूपम देवी को सोमवार को पहुंचना था लेकिन वे नहीं गईं। आखिर वे वहां पहुंचकर करतीं भी क्या? वे सोमवार को स्कूल में बच्चों को खाना खिलाती रहीं। हालांकि उनके विद्यालय के शिक्षकों ने इस बारे में प्रशासन से मार्गदर्शन मांगा , पर कोई जवाब नहीं मिला। धनबाद के एडीएम लॉ एंड ऑर्डर हेमा प्रसाद ने कहा है कि वे इस मामले से अनभिज्ञ हैं। दंडाधिकारी के लिए नाम शिक्षा विभाग ने ही भेजा था। इसमें गलती कहां हुई है, इसकी जांच कराई जाएगी।

हिंदी के शिक्षक को देना थी जिम्मेदारी

झारखंड के सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना के संचालन के लिए माता समिति गठित की जाती है। रूपम देवी इसी समिति की संयोजिका हैं। उनका बच्चों को पढ़ाने के काम से कोई संबंध नहीं है। रूपम देवी तीन साल से माता समिति संयोजिका की जिम्मेदारी निभा रही हैं। यह हैरत की बात है कि जिला प्रशासन ने माता समिति की संयोजिका को दंडाधिकारी बना दिया। उन्हें जिम्मेदारी भी हिन्दी लेखन क्षमता की जांच की दी गई। उनसे पहले यह जिम्मा प्लस टू स्कूल धनबाद की हिंदी की शिक्षिका आशा कुमारी को दी गई थी। वास्तव में यह जिम्मा किसी हिंदी शिक्षक को ही दिया जाना था। लेकिन प्रशासन ने यह जिम्मा रूपम देवी को दे दिया जो कि यह काम करने में सक्षम नहीं हैं।

अब उठ रहे बड़े सवाल

* क्या मजिस्ट्रेट नियुक्ति के लिए कोई तय मानक नहीं?

* क्या प्रशासनिक पद अब औपचारिकता बनते जा रहे हैं?

* क्या यह सिस्टम की गंभीर लापरवाही है?


जनता और विपक्ष दोनों जवाब मांग रहे हैं।

धनबाद की यह घटना सिर्फ एक प्रशासनिक गड़बड़ी नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था की उस कमजोरी को उजागर करती है जहां जिम्मेदारी से पहले प्रक्रिया और योग्यता पीछे छूट जाती है।
क्योंकि कानून व्यवस्था प्रयोग नहीं होती — यह भरोसे का विषय होती है।

TAGGED:
Share This Article
Leave a Comment