Jharkhand Rajya Sabha : 56 विधायक… फिर भी हार गई कांग्रेस! झारखंड में तेजस्वी ने लिया बिहार का बदला? राज्यसभा चुनाव में INDIA गठबंधन की खुली पोल

Sushmita Mukherjee

Jharkhand Rajya Sabha : झारखंड के राज्यसभा चुनाव ने INDIA गठबंधन की एकता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सदन में 56 विधायकों का मजबूत आंकड़ा होने के बावजूद कांग्रेस अपने उम्मीदवार प्रणव झा को जीत नहीं दिला सकी। दूसरी ओर बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवाणी ने शानदार जीत दर्ज कर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। अब इस हार के पीछे क्रॉस वोटिंग, अंदरूनी बगावत और “बिहार के बदले” की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है।

संख्या पूरी थी… फिर कांग्रेस कैसे हार गई?

81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में INDIA गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं। इनमें जेएमएम के 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और माले के 2 विधायक शामिल हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए सिर्फ 28 वोट चाहिए थे। ऐसे में गठबंधन आसानी से दोनों सीटें जीत सकता था, लेकिन नतीजा बिल्कुल उल्टा निकला।

पहला खेल: जेएमएम ने अपनी सीट पहले की सुरक्षित

जेएमएम ने अपने उम्मीदवार बैजनाथ राम की जीत सुनिश्चित करने के लिए जरूरत से ज्यादा 30 वोट दिला दिए। जीत के लिए 28 वोट ही काफी थे, लेकिन पार्टी ने कोई जोखिम नहीं लिया। इसके बाद कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा के हिस्से में कांग्रेस के 16 और जेएमएम के केवल 4 वोट ही आए।

दूसरा खेल: नाथवाणी ने कर दिया पूरा समीकरण ध्वस्त

बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवाणी के पास विधायक जयराम महतो के साथ विपक्ष के 25 वोट पहले से थे। जीत के लिए उन्हें सिर्फ 3 अतिरिक्त वोट चाहिए थे, लेकिन वे 5 अतिरिक्त वोट जुटाने में सफल रहे। यहीं से पूरा चुनाव पलट गया और कांग्रेस की उम्मीदें धराशायी हो गईं।

राजद-माले पर ‘धोखे’ का आरोप

कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि राजद और माले ने गठबंधन के साथ विश्वासघात किया। चर्चा है कि दोनों दलों के विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर नाथवाणी का रास्ता आसान बना दिया। बताया जा रहा है कि नाथवाणी को मिले 5 अतिरिक्त वोटों में से 2 वोट रद्द हुए, जबकि कांग्रेस के पक्ष में पड़ा एक वोट भी अमान्य घोषित कर दिया गया।

राजद का रहस्यमयी जवाब

वोटिंग के बाद राजद के पर्यवेक्षक भोला यादव ने सिर्फ इतना कहा कि “हाईकमान के निर्देश के मुताबिक वोटिंग हुई है।” लेकिन हाईकमान का निर्देश क्या था, इस पर उन्होंने चुप्पी साध ली। वहीं जेएमएम भी फिलहाल खुलकर कुछ बोलने से बच रहा है।

क्या तेजस्वी ने लिया बिहार का बदला?

राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा यही है कि यह सिर्फ क्रॉस वोटिंग नहीं, बल्कि तीन महीने पुराना राजनीतिक हिसाब बराबर करने की कार्रवाई है। अप्रैल में बिहार राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस विधायकों की कथित क्रॉस वोटिंग के कारण राजद उम्मीदवार अमरेंद्र सिंह धारी हार गए थे। अब कहा जा रहा है कि झारखंड में उसी का “सियासी बदला” लिया गया।

INDIA गठबंधन की एकता पर बड़ा सवाल

झारखंड का यह परिणाम सिर्फ एक चुनावी हार नहीं, बल्कि INDIA गठबंधन के भीतर अविश्वास, अंदरूनी खींचतान और राजनीतिक बदले की कहानी भी बयां कर रहा है। सवाल अब यह है कि जब अपने ही साथ नहीं हैं, तो विपक्ष सत्ता की लड़ाई कैसे लड़ेगा?

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