* राम मंदिर चढ़ावा और जमीन खरीद मामले में SIT का शिकंजा, चंपत राय समेत तीन बड़े पदाधिकारियों से घंटों पूछताछ
Ram Mandir : राम मंदिर में चढ़ावे की कथित गड़बड़ी और जमीन खरीद-फरोख्त में अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने गुरुवार को एक बार फिर अयोध्या पहुंचकर जांच तेज कर दी। इस दौरान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा और सहायक प्रशासक गोपाल राव से अलग-अलग और आमने-सामने पूछताछ की गई।
13 जून को गठित SIT पहले भी छह दिनों तक जांच कर प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंप चुकी है। दूसरी बार अयोध्या पहुंची टीम ने इस बार जांच का दायरा और बढ़ाते हुए चढ़ावे की गणना से लेकर जमीन खरीद की पूरी प्रक्रिया को खंगाला।
अनिल मिश्रा से पूछे गए अहम सवाल
SIT ने सबसे पहले ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा से चढ़ावे की गिनती और उसकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विस्तृत जानकारी ली। जांच अधिकारियों ने पूछा कि दान की गणना कैसे होती थी, गिनती के बाद नकदी बैंक तक किस प्रक्रिया से पहुंचती थी, इसमें किन-किन लोगों की जिम्मेदारी होती थी और निजी सुरक्षा कर्मियों की भूमिका क्या रहती थी।
इसके अलावा दान पात्र में मिलने वाले सोने-चांदी के आभूषणों को सुरक्षित रखने, उनकी गणना और बैंक तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था पर भी सवाल किए गए।
गोपाल राव से जमीन और आभूषणों पर पूछताछ
इसके बाद SIT ने सहायक प्रशासक गोपाल राव से पूछताछ की। गोपाल राव मंदिर में आने वाले बहुमूल्य आभूषणों और चढ़ावे के संरक्षण की जिम्मेदारी संभालते रहे हैं। इसलिए जांच टीम ने उनसे सोने-चांदी के आभूषणों के रखरखाव, रिकॉर्ड और सुरक्षा को लेकर विस्तार से जानकारी ली।
जांच का दूसरा बड़ा पहलू मंदिर निर्माण के दौरान हुई जमीन खरीद है। आरोप है कि जमीनों की खरीद-फरोख्त में भारी कमीशनबाजी हुई। इसी वजह से SIT ने गोपाल राव से जमीनों के चयन, सत्यापन, खरीद प्रक्रिया और उसमें उनकी भूमिका को लेकर भी कई सवाल पूछे।
चंपत राय से बयानों का मिलान
अनिल मिश्रा और गोपाल राव से पूछताछ के बाद SIT ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से भी लंबी पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसी का उद्देश्य दोनों अधिकारियों के बयानों का मिलान करना था। टीम यह जानना चाहती है कि तीनों के बयान एक-दूसरे से मेल खाते हैं या नहीं, कहीं कोई तथ्य छिपाया तो नहीं गया और पूरी प्रक्रिया में किसकी क्या जिम्मेदारी थी।
सुरक्षा कर्मियों और कर्मचारियों से भी पूछताछ
SIT ने चढ़ावे की गिनती, सुरक्षा व्यवस्था और बैंक तक धन पहुंचाने की प्रक्रिया से जुड़े सुरक्षा गार्डों, सिक्योरिटी स्टाफ और ट्रस्ट द्वारा नियुक्त अन्य कर्मचारियों से भी अलग-अलग पूछताछ की है। जांच एजेंसी पूरी चेन को समझने और किसी भी संभावित लापरवाही या अनियमितता की पड़ताल कर रही है।
राम निवास मंदिर को लेकर नया विवाद
इसी बीच जांच के दौरान राम मंदिर परिसर से सटे प्राचीन राम निवास मंदिर को लेकर नया विवाद भी सामने आया है।
खुद को राम निवास मंदिर का पंच प्रमुख बताने वाले हरिशंकर सफारीवाला ने आरोप लगाया कि चंपत राय और उनके सहयोगियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर मंदिर की संपत्ति पर कब्जा करने की साजिश रची। उनका दावा है कि यह एक पंचायती मंदिर है, जिसकी संपत्ति बेचने का अधिकार किसी एक व्यक्ति को नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर को बिक्री योग्य संपत्ति दिखाकर करीब 5.80 करोड़ रुपये का कथित फर्जी सौदा तैयार किया गया। इतना ही नहीं, उनके अनुसार उनकी ओर से नियुक्त पुजारी और उसके रिश्तेदारों के बैंक खातों में लगभग 60 लाख रुपये भेजे गए और इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर मंदिर पर कब्जा करने की कोशिश की गई।
हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दूसरी ओर SIT पूरे मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है और आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।