Reservation Hatao Andolan : देशभर में आरक्षण और यूजीसी (UGC) के नए नियमों को लेकर असंतोष अब बेकाबू होता जा रहा है। रविवार को राजधानी दिल्ली के हाई-सिक्योरिटी जोन कनॉट प्लेस (CP) से लेकर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ तक जोरदार विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। सड़कों पर उतरे युवाओं के आक्रोश को भांपते हुए पुलिस ने भारी बल तैनात किया और धारा 144 व प्रदर्शन की अनुमति न होने का हवाला देते हुए दर्जनों प्रदर्शनकारियों को जबरन हिरासत में ले लिया।
दिल्ली: कनॉट प्लेस पर पुलिस का शिकंजा, रात तक चली धरपकड़
राजधानी में प्रदर्शनकारियों ने वर्तमान आरक्षण नीति, ‘यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026’ और रोस्टर सिस्टम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। दिल्ली पुलिस द्वारा पहले ही शाह ऑडिटोरियम और कनॉट प्लेस जैसे इलाकों में प्रदर्शन पर सख्त रोक लगाए जाने के बावजूद हजारों युवा अचानक कनॉट प्लेस और जंतर-मंतर पर जमा हो गए।
* हिरासत और कार्रवाई: स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने मोर्चा संभालते हुए दर्जनों प्रदर्शनकारियों को बसों में भरकर हिरासत में लिया और देर रात दूर ले जाकर छोड़ा।
* सोशल मीडिया से लामबंदी: इस पूरे आंदोलन की रीढ़ सोशल मीडिया बनी, जहां इंस्टाग्राम पर ‘RHA’ पेज के जरिए ‘चलो दिल्ली और CP मार्च’ की खुली अपील की गई थी।
लखनऊ: ‘संवैधानिक अछूत’ की तख्तियां और जनप्रतिनिधियों की सांकेतिक शवयात्रा
लखनऊ में सवर्ण मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने गोमती नगर के 1090 चौराहे पर चक्का जाम जैसी स्थिति पैदा कर दी।
* तीखा विरोध: प्रदर्शनकारी हाथों में ‘संवैधानिक अछूत’ लिखी तख्तियां लेकर यूजीसी नियमों को तुरंत वापस लेने (Rollback) के नारे लगा रहे थे।
* शवयात्रा का रोष: आक्रोशित युवाओं ने चौराहे से बैकुंठ धाम की ओर बढ़ते हुए सवर्ण सांसदों और विधायकों की सांकेतिक शवयात्रा निकालकर अपनी ही नुमाइंदगी करने वाले नेताओं के खिलाफ कड़ा संदेश दिया।
सियासी घमासान: नेताओं की दो टूक प्रतिक्रिया
सड़कों पर मचे इस घमासान ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचप्रतिक्रिया…
* ओमप्रकाश राजभर (कैबिनेट मंत्री, UP): उन्होंने आरक्षण खत्म करने की मांग को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि बाबा साहेब आंबेडकर द्वारा वंचितों को मुख्यधारा में लाने के लिए दी गई व्यवस्था को खत्म नहीं किया जा सकता।
* मायावती (बसपा प्रमुख): उन्होंने जंतर-मंतर पर आर्थिक आधार पर आरक्षण की उठाई जा रही नई मांगों का कड़ा विरोध करते हुए इसे गैर-वाजिब बताया।
आरक्षण, यूजीसी नियमों और एससी-एसटी एक्ट को लेकर दिल्ली से लखनऊ तक भड़का यह आंदोलन अब केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं रहा, बल्कि केंद्र और राज्य सरकारों के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन चुका है।
