Supreme Court: देशभर में बुलडोजर एक्शन की तैयारी! सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, अब इन इमारतों पर चलेगा हथौड़ा

Bindash Bol

* सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: अवैध निर्माण और रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों पर चलेगा बुलडोजर, लापरवाही बरतने वाले अफसरों पर भी गिरेगी गाज

Supreme Court: देश के शहरों में बेखौफ फल-फूल रहे अवैध निर्माण और रिहायशी इलाकों में धड़ल्ले से चल रही कमर्शियल गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। दिल्ली, पटना और लखनऊ जैसे प्रमुख शहरों में नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले बख्शे नहीं जाएंगे। शीर्ष अदालत के इस सख्त रुख के बाद अब अवैध ढांचों को ढहाने, संपत्तियों को सील करने और बरसों से आंखें मूंदे बैठे लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का रास्ता साफ हो गया है।

जनसुरक्षा पर कोई समझौता नहीं: अदालत

​जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने सुनवाई के दौरान दिल्ली के होटल और लखनऊ के कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांडों का प्रमुखता से जिक्र किया। पीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रशासन हादसों के बाद जागने के बजाय पहले से सतर्क क्यों नहीं रहता?
​अदालत ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि जहां आम लोगों के रहने की मंजूरी है, वहां अवैध तरीके से दुकान, ऑफिस, कोचिंग सेंटर और गोदाम चलाए जा रहे हैं। इससे न केवल ट्रैफिक और पार्किंग की समस्या पैदा होती है, बल्कि आग जैसी आपात स्थिति में सैकड़ों लोगों की जान दांव पर लग जाती है।

तीन प्रमुख शहरों का लेखा-जोखा

* ​दिल्ली ( MCD और NDMC को फटकार): लाजपत नगर और सरोजिनी नगर मार्केट में इमारतों की मजबूती और नियमों के उल्लंघन की जांच के लिए सर्वे शुरू न होने पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। 9 जुलाई को आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों की कमेटी गठित करने का आदेश दिया गया था, लेकिन विभागों की ढिलाई के कारण काम अटका रहा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि जनसुरक्षा से जुड़े मामलों में कोई हीला-हवाली बर्दाश्त नहीं होगी।

* ​पटना (26,746 मामले उजागर, पूर्व नगर आयुक्त को नोटिस): पटना नगर निगम के हलफनामे ने नियमों की धज्जियां उड़ने की पोल खोल दी है। सर्वे में 26,746 ऐसे मामले सामने आए हैं जहां आवासीय परिसरों का व्यावसायिक उपयोग हो रहा था। कोर्ट ने सवाल उठाया कि इतना बड़ा उल्लंघन वर्षों तक प्रशासन की नजरों से कैसे छिपा रहा? अदालत ने पूर्व नगर आयुक्त पराशर को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके कार्यकाल में हुई इस बड़ी लापरवाही के लिए उन पर कार्रवाई क्यों न की जाए।

* ​लखनऊ (युद्धस्तर पर कार्रवाई का आश्वासन): लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को भी दिल्ली की तर्ज पर व्यापक सर्वे करने का आदेश दिया गया है। एलडीए उपाध्यक्ष ने अदालत को अवगत कराया कि अब तक 51 अवैध संपत्तियों की पहचान कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है और पूरे शहर में यह अभियान युद्धस्तर पर चलाया जाएगा।

अब केवल निर्माण नहीं, जिम्मेदार अफसर भी नपेंगे

​सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से साफ संदेश गया है कि गाज सिर्फ नियम तोड़ने वाली इमारतों पर ही नहीं गिरेगी, बल्कि उन अफसरों की कुर्सी भी खतरे में है जिनकी शह या अनदेखी के कारण यह अवैध खेल बरसों तक चलता रहा। अदालत की सर्वोच्च प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि प्रशासनिक सुस्ती के कारण किसी भी नागरिक की जान खतरे में न पड़े।

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