PM Modi : 115 द्वीपों वाला छोटा सा देश… लेकिन भारत के लिए क्यों है इतना अहम? सेशेल्स से हमें क्या मिलता है और क्यों बढ़ रही है इसकी अहमियत?

Siddarth Saurabh

PM Modi : हिंद महासागर में बसा महज 115 द्वीपों वाला छोटा-सा देश सेशेल्स इन दिनों एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में है। वजह है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस द्वीपीय देश की यात्रा, जहां उन्होंने स्वतंत्रता की स्वर्ण जयंती के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया। सवाल उठता है कि आखिर आबादी और क्षेत्रफल के लिहाज से बेहद छोटे इस देश को भारत इतना महत्व क्यों देता है? क्या सेशेल्स भारत को कोई बड़ी सप्लाई करता है, या इसके पीछे कोई और रणनीतिक वजह है?

क्या सेशेल्स भारत को कोई जरूरी सामान सप्लाई करता है?

सीधा जवाब है—नहीं। सेशेल्स भारत के लिए कोई बड़ा तेल, गैस या खनिज आपूर्तिकर्ता नहीं है। दोनों देशों के बीच व्यापार भी अपेक्षाकृत सीमित है। भारत के लिए इसकी सबसे बड़ी अहमियत रणनीतिक और सुरक्षा से जुड़ी है, न कि किसी बड़े आयात-निर्यात से।

हिंद महासागर का रणनीतिक ‘चौकीदार’

सेशेल्स पश्चिमी हिंद महासागर में स्थित है। इसके 115 द्वीप उन समुद्री रास्तों के बेहद करीब हैं, जिनसे दुनिया के बड़े हिस्से का तेल, गैस और अन्य सामान एक देश से दूसरे देश तक पहुंचता है। इन समुद्री मार्गों की सुरक्षा भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

सेशेल्स के पास लगभग 13 लाख वर्ग किलोमीटर का विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) है। इतने विशाल समुद्री क्षेत्र की निगरानी और सुरक्षा में भारत लगातार सहयोग करता रहा है। इससे भारत को पूरे हिंद महासागर में अपनी समुद्री निगरानी और रणनीतिक उपस्थिति मजबूत करने में मदद मिलती है।

चीन की बढ़ती मौजूदगी पर नजर

पिछले कुछ वर्षों में चीन हिंद महासागर क्षेत्र में बंदरगाहों, निवेश और रक्षा सहयोग के जरिए अपना प्रभाव बढ़ाने में जुटा है। इसे अक्सर ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ रणनीति कहा जाता है।
ऐसे में सेशेल्स जैसे देशों के साथ भारत की मजबूत साझेदारी सिर्फ दोस्ती नहीं, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बनाए रखने की रणनीति का भी हिस्सा मानी जाती है। इससे भारत हिंद महासागर में अपनी स्थिति मजबूत रखते हुए चीन के बढ़ते प्रभाव का संतुलन बनाने की कोशिश करता है।

भारत की समुद्री सुरक्षा का मजबूत साझेदार

प्रधानमंत्री मोदी की SAGAR (Security and Growth for All in the Region) नीति में सेशेल्स की अहम भूमिका है। भारत ने समय-समय पर सेशेल्स को डोर्नियर निगरानी विमान, गश्ती नौकाएं और रक्षा प्रशिक्षण उपलब्ध कराया है। दोनों देश समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ने, तस्करी और समुद्री अपराधों से निपटने के लिए भी मिलकर काम करते हैं।

भारतीय नौसेना के लिए क्यों जरूरी है सेशेल्स?

भारत की समुद्री सीमाएं बेहद लंबी हैं और देश का अधिकांश विदेशी व्यापार समुद्री रास्तों से होता है। ऐसे में हिंद महासागर में विश्वसनीय मित्र देशों का सहयोग भारतीय नौसेना के लिए बेहद अहम है। सेशेल्स के साथ रक्षा सहयोग भारत को इस क्षेत्र में अपनी परिचालन क्षमता, निगरानी और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क मजबूत करने में मदद करता है।

भारतीय समुदाय भी बनता है मजबूत कड़ी

सेशेल्स की आबादी का लगभग 12 प्रतिशत हिस्सा भारतीय मूल का है। यह समुदाय दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक रिश्तों को मजबूत बनाता है। साथ ही, अफ्रीका के पूर्वी तट तक भारत की आर्थिक पहुंच बढ़ाने में भी यह संबंध महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

क्यों खास रही पीएम मोदी की यात्रा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा सिर्फ एक औपचारिक राजकीय दौरा नहीं, बल्कि हिंद महासागर में भारत की दीर्घकालिक रणनीति का अहम संकेत मानी जा रही है। यह संदेश भी स्पष्ट है कि भारत अपने पड़ोसी और मित्र द्वीपीय देशों के साथ संबंधों को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

सेशेल्स भले ही आकार में छोटा हो, लेकिन हिंद महासागर की भू-राजनीति में उसका महत्व बेहद बड़ा है। भारत के लिए यह देश किसी बड़े व्यापारिक सप्लायर से ज्यादा एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार है। समुद्री सुरक्षा, चीन की बढ़ती चुनौती, रक्षा सहयोग और हिंद महासागर में संतुलन बनाए रखने की दृष्टि से सेशेल्स आने वाले वर्षों में भी भारत की विदेश नीति का महत्वपूर्ण केंद्र बना रहेगा।

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