* 100 से अधिक छात्राएं अचानक उल्टी-दस्त से बीमार
* हॉस्टल में वार्डन व अधिकारी नदारद, सिर्फ गार्ड मौजूद
* अभिभावकों को बच्चियों से मिलने से रोके जाने का आरोप
Kasturba School : गढ़वा.. झारखंड के गढ़वा जिले के खरौंधी स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में लापरवाही की ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने पूरे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुक्रवार शाम 100 से अधिक छात्राएं अचानक उल्टी, दस्त और पेट दर्द से बीमार पड़ गईं, जबकि करीब 60 छात्राओं का अस्पताल में इलाज जारी है।
दूषित खाना और उबलता पानी बना आफत
छात्राओं के मुताबिक दोपहर में उन्हें पुआ और चावल परोसा गया। मुहर्रम के कारण घंटों बिजली गुल रही। भीषण गर्मी में छत पर रखी प्लास्टिक की टंकी का पानी खौलने जैसा गर्म हो गया, लेकिन पीने के लिए मजबूरन वही पानी दिया गया। शाम को मुरही (मुरमुरा) खिलाया गया, लेकिन पीने के लिए साफ पानी तक उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके बाद एक-एक कर छात्राओं की तबीयत बिगड़ती चली गई।
हॉस्टल में न वार्डन, न अधिकारी… सिर्फ गार्ड के भरोसे छात्राएं
सबसे गंभीर बात यह रही कि घटना के समय हॉस्टल में न वार्डन मौजूद थीं, न अकाउंटेंट और न ही कोई जिम्मेदार अधिकारी। पूरा हॉस्टल सिर्फ गार्ड के भरोसे चल रहा था। आरोप है कि छात्राओं की तबीयत बिगड़ने के बावजूद प्रबंधन ने मामले को दबाने की कोशिश की।
अभिभावकों को गेट पर रोका, पुलिस ने खुलवाया हॉस्टल
जब बच्चियों की हालत गंभीर होने लगी और परिजन हॉस्टल पहुंचे तो उन्हें अंदर जाने तक नहीं दिया गया। अपने ही बच्चों से मिलने के लिए अभिभावकों को घंटों गेट पर गिड़गिड़ाना पड़ा। हालात बिगड़ने पर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा, तब जाकर हॉस्टल का दरवाजा खुला।
रात 9 बजे के बाद अस्पताल पहुंचीं छात्राएं
आरोप है कि छात्राओं की तबीयत शाम से ही बिगड़ रही थी, लेकिन रात करीब 9 बजे उन्हें अस्पताल ले जाया गया। भवनाथपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती 20 से अधिक छात्राओं की हालत गंभीर बताई गई है। नैना और काजल सहित कई छात्राओं की स्थिति चिंताजनक रही।
जेनरेटर था, फिर भी नहीं मिली पानी की सुविधा
छात्राओं का कहना है कि विद्यालय परिसर में जेनरेटर मौजूद है, लेकिन पानी की मोटर तक नहीं चलाई गई। भीषण गर्मी के बावजूद पीने के पानी की व्यवस्था नहीं की गई, जिससे हालात और बिगड़ गए।
अधिकारी पहुंचे, जांच शुरू
घटना की सूचना मिलते ही बीडीओ नंद जी राम और अंचलाधिकारी शंभू राम अस्पताल पहुंचे और इलाज की व्यवस्था का जायजा लिया। पीएचसी प्रभारी डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला फूड प्वाइजनिंग और अत्यधिक गर्मी में दूषित/गर्म पानी पीने का प्रतीत होता है। सभी छात्राओं का इलाज जारी है और स्थिति फिलहाल नियंत्रण में बताई जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल
जब 300 बच्चियों की जिम्मेदारी प्रशासन पर थी, तब हॉस्टल बिना वार्डन और जिम्मेदार अधिकारियों के कैसे चल रहा था?
अगर समय रहते इलाज नहीं मिलता, तो क्या यह हादसा और भयावह रूप नहीं ले सकता था?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी, या मामला जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?