Ram Mandir : राम मंदिर चढ़ावा चोरी: कंट्रोल रूम प्रभारी समेत 40 लोग SIT जांच के घेरे में, सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी

Bindash Bol

Ram Mandir : राम मंदिर में करोड़ों रुपये के चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में करीब 40 लोगों की भूमिका संदिग्ध या लापरवाहीपूर्ण पाई गई है। इनमें कंट्रोल रूम प्रभारी, गणना कक्ष के बाहर तैनात निजी सुरक्षा कर्मी, पुलिस और पीएसी के जवान समेत कई कर्मचारी शामिल हैं। अब सभी की भूमिका की अलग-अलग गहन जांच की जा रही है।

दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई

जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, SIT रिपोर्ट के आधार पर कर्मचारियों का वर्गीकरण किया जा रहा है। जिन लोगों की चोरी में प्रत्यक्ष आपराधिक संलिप्तता सामने आएगी, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, जिन अधिकारियों या कर्मचारियों की केवल ड्यूटी में लापरवाही साबित होगी, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

कई स्तरों पर फेल हुई सुरक्षा व्यवस्था

SIT रिपोर्ट में कहा गया है कि राम मंदिर जैसे हाई-सिक्योरिटी परिसर में इतनी बड़ी घटना सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाती है। गणना कक्ष और उसके आसपास तैनात सुरक्षा कर्मियों की जिम्मेदारियां स्पष्ट होने के बावजूद निगरानी में कई बड़ी चूक सामने आईं। जांच के अनुसार, इन्हीं खामियों का फायदा उठाकर चोरी को अंजाम दिया गया।

ट्रस्ट पदाधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के किसी भी पदाधिकारी को अभी क्लीन चिट नहीं दी गई है। महासचिव चंपत राय, सदस्य अनिल मिश्रा और निर्माण समिति से जुड़े सहायक गोपाल राव की भूमिका की भी जांच जारी है। SIT यह पता लगा रही है कि प्रशासनिक स्तर पर कहीं कोई गंभीर लापरवाही तो नहीं हुई। अंतिम रिपोर्ट में इस संबंध में और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

नई SOP और हाई-टेक सुरक्षा व्यवस्था की सिफारिश

घटना के बाद SIT ने मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की सिफारिश की है। रिपोर्ट में मौजूदा सुरक्षा कर्मियों के फेरबदल, निगरानी तंत्र को अत्याधुनिक बनाने और नई सख्त स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू करने का सुझाव दिया गया है। उद्देश्य भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना और चढ़ावे की पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाना है।

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