Iran USA : पश्चिम एशिया एक बार फिर बारूद के ढेर पर खड़ा है। कुछ ही दिन पहले जिस नाजुक युद्धविराम और कूटनीतिक समझौते से शांति की उम्मीद जगी थी, वह अब मिसाइलों और ड्रोन हमलों की गूंज में बिखरता नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान आमने-सामने हैं, और पूरे क्षेत्र में जबरदस्त सैन्य तनाव फैल चुका है।
आधी रात का अमेरिकी हमला, ईरान के सैन्य ठिकाने बने निशाना
तनाव उस वक्त चरम पर पहुंच गया जब होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक कमर्शियल टैंकर पर कथित ड्रोन हमले के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान शुरू कर दिया। आधी रात अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन ठिकानों, तटीय रडार साइटों और सैन्य प्रतिष्ठानों पर ताबड़तोड़ एयरस्ट्राइक की।
हमलों के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त संदेश देते हुए कहा, “अब बातचीत का समय खत्म हो चुका है। आगे क्या होता है, दुनिया देखेगी।”
ईरान का पलटवार, बहरीन में US Fifth Fleet पर दागीं मिसाइलें
अमेरिकी हमलों के कुछ ही घंटों बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई का ऐलान कर दिया। ईरान ने बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना के सबसे अहम रणनीतिक अड्डे US Fifth Fleet Headquarters को मिसाइलों और आत्मघाती ड्रोन से निशाना बनाया।
हमले के दौरान बहरीन में कई जोरदार धमाके सुनाई दिए और पूरे इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका इस चुनौती का जवाब देगा और किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेगा।
बहरीन का कड़ा विरोध, संप्रभुता पर हमला बताया
ईरानी हमले के बाद बहरीन सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे अपनी संप्रभुता का खुला उल्लंघन और नागरिकों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया। विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
हालांकि शुरुआती जानकारी के मुताबिक, अब तक किसी बड़े जान-माल के नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
क्या फिर भड़क उठेगा पूरा पश्चिम एशिया?
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की सबसे अहम लाइफलाइन है। यदि यहां सैन्य टकराव और बढ़ता है तो वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।
एक सप्ताह पहले तक जिस शांति समझौते से उम्मीदें जुड़ी थीं, वह अब लगातार हो रहे हमलों के बीच बेहद कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह संघर्ष सीमित रहेगा या पूरे क्षेत्र को एक बड़े युद्ध की ओर धकेल देगा।