Abhijeet Dipke : अभिजीत दीपके की एक बात ने पिता की आंखें नम कर दीं, संघर्ष की कहानी सुनकर भावुक हो जाएंगे आप….!
दिल्ली के जंतर-मंतर से उठी छात्रों की आवाज़ ने आखिरकार देश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था दोनों को झकझोर दिया। लंबे आंदोलन, लगातार विरोध और छात्रों के बढ़ते दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके स्थान पर प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक ऐसी कहानी सामने आई, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया।
आंदोलन नहीं, एक बेटे का त्याग भी था
छात्र आंदोलन का चेहरा बने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके लगातार जंतर-मंतर पर डटे रहे। हजारों छात्रों के बीच उनकी मौजूदगी आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत बन गई। इसी दौरान एबीपी न्यूज़ की रिपोर्ट में उनके पिता भगवानराव दीपके ने जो बातें साझा कीं, उन्होंने इस आंदोलन को एक मानवीय और भावनात्मक आयाम दे दिया।
“पापा… दिल्ली मत आइए”
भगवानराव दीपके ने बताया कि 20 जुलाई के बाद हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे थे। परिवार की चिंता बढ़ती जा रही थी। एक पिता होने के नाते उन्होंने तय किया कि वह दिल्ली जाकर बेटे को घर वापस ले आएंगे।
लेकिन तभी अभिजीत का फोन आया।
उसने बेहद शांत लेकिन दृढ़ आवाज़ में कहा—
“पापा… आप दिल्ली मत आइए। और मुझे बार-बार फोन भी मत कीजिए। अब मैं सिर्फ आपका बेटा नहीं हूं… मैं पूरे देश के लाखों छात्रों की आवाज़ बन चुका हूं।”
बेटे के ये शब्द सुनकर पिता की आंखें भर आईं। एक तरफ बेटे की सुरक्षा की चिंता थी, दूसरी तरफ उसके संकल्प पर गर्व भी।
“आज मेरा बेटा सिर्फ मेरा नहीं रहा”
भगवानराव दीपके ने कहा कि उस पल उन्हें एहसास हुआ कि उनका बेटा अब केवल परिवार का हिस्सा नहीं, बल्कि उन लाखों छात्रों की उम्मीद बन चुका है जो अपने भविष्य के लिए सड़क पर संघर्ष कर रहे थे। एक पिता के लिए यह क्षण जितना कठिन था, उतना ही गर्व से भरा भी।
इस्तीफे पर क्या बोले पिता?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर भगवानराव दीपके ने कहा कि यह फैसला छात्रों की भावनाओं और उनके आक्रोश को देखते हुए सही समय पर लिया गया। उन्होंने कहा कि शुरुआत में आंदोलन केवल जंतर-मंतर तक सीमित था, लेकिन धीरे-धीरे इसकी गूंज पूरे देश में सुनाई देने लगी। बड़ी संख्या में छात्र और अभिभावक सरकार से जवाब चाहते थे।
अब नई जिम्मेदारी, नई उम्मीदें
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी ने शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाल लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए इसकी जानकारी भी दी। अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती छात्रों का विश्वास दोबारा जीतने और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े अहम मुद्दों पर तेजी से फैसले लेने की होगी।
यह आंदोलन केवल राजनीतिक बदलाव की कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसे बेटे की कहानी भी बन गया जिसने अपने परिवार से ऊपर देश के छात्रों की लड़ाई को रखा। पिता के लिए यह पल भावुक करने वाला था, लेकिन शायद हर उस अभिभावक के लिए गर्व का भी, जिसका बेटा अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज की आवाज़ बन जाए।