CWG 2026: कभी खेतों में मवेशियों के लिए चारा काटते हुए भूसा काटने की मशीन चलाने वाली एक साधारण किसान की बेटी आज भारत का गौरव बन चुकी है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय वेटलिफ्टर हरजिंदर कौर ने महिलाओं की 69 किलोग्राम भारवर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीत लिया। उन्होंने कुल 227 किलोग्राम वजन उठाकर अपना नया पर्सनल बेस्ट बनाया और भारत की झोली में 11वां पदक डाला। स्नैच में 101 किलो और क्लीन एंड जर्क में 126 किलो वजन उठाकर हरजिंदर ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मेहनत के आगे कोई मुश्किल बड़ी नहीं होती।
लेकिन इस मेडल के पीछे सिर्फ ताकत नहीं, बल्कि वर्षों का संघर्ष, त्याग और अटूट हौसला छिपा है।
पंजाब के नाभा के मेहस गांव में एक छोटे से एक कमरे के घर में पली-बढ़ी हरजिंदर का बचपन अभावों के बीच बीता। परिवार कॉन्ट्रैक्ट पर खेती करता था और घर में छह भैंसों की देखभाल की जिम्मेदारी भी थी। बचपन से ही वह खेतों में काम करतीं, मवेशियों के लिए चारा काटतीं और भूसा काटने की मशीन चलाती थीं। शायद उन्हें तब भी अंदाजा नहीं था कि यही मेहनत एक दिन उनकी बाजुओं को इतनी ताकत देगी कि दुनिया उनकी ताकत का लोहा मानेगी।
पिता साहिब सिंह और मां कुलदीप कौर की सबसे छोटी बेटी हरजिंदर को बचपन से ही खेलों से प्यार था। सरकारी गर्ल्स स्कूल में पढ़ाई के दौरान उन्होंने कबड्डी खेलना शुरू किया। रोज़ 5 किलोमीटर साइकिल चलाकर अभ्यास के लिए जाना उनकी दिनचर्या थी। आनंदपुर साहिब कॉलेज में कोच सुरिंदर सिंह ने उनकी प्रतिभा पहचानी, जबकि पंजाबी यूनिवर्सिटी में कोच परमजीत शर्मा ने उनकी असाधारण शारीरिक ताकत देखकर उन्हें पहले रस्साकशी और फिर वेटलिफ्टिंग की ओर बढ़ने की सलाह दी।
शुरुआत आसान नहीं थी। नया खेल, नई चुनौतियां और सीमित संसाधन—लेकिन हरजिंदर ने हार मानना नहीं सीखा। उन्होंने हर कठिनाई को अपनी ताकत बनाया और आज उसी मेहनत ने उन्हें दुनिया के बड़े मंच पर भारत के लिए सिल्वर मेडल दिलाया।
2022 में कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज जीतने वाली हरजिंदर ने इस बार सिल्वर जीतकर साबित कर दिया कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती। खेतों से शुरू हुआ यह सफर आज देश के करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है। हरजिंदर कौर की कहानी बताती है कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो मंजिल एक दिन जरूर मिलती है।